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UNITY IN DIVERSITY(( thought by sneh premchand)

एक ही वृक्ष के हैं हम फल,फूल,पत्ते,कलियाँ,अंकुर और हरी भरी शाखाएँ,विवधता है बेशक बाहरी स्वरूपों में हमारे,पर मन की एकता की मिलती हैं राहें, हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई, हैं सब आपस में भाई  भाई,एक खून है,एक ही तन है,इंसा ने ही है ये जात पात बनाई,वसुधैव कुटुम्बकम की भावना काश की हमने होती अपनाई, फिर ना बनाता जश्न कोई किसी की मौत का,न हमने सरहद समझी होती परायी,जीयो और जीने दो के सिद्धांत की,क्यों नही हमने घर घर अलख जलाई,आतंकवाद का हो जाये  खात्मा,ईद दिवाली हो सब ने संग मनाई,सुसंस्कारों की घुट्टी पीले अब हर इंसा, बदल दे अपनी सोच की राहें, धरा बन जायेगी स्वर्ग फिर बंध,ूअपने लाल को खो कर किसी माँ की नही निकलेंगी आहें,एक ही वृक्ष के हैं हम फल,फूल,पत्ते और हरी भरी शाखाएँ

SINGER Zubeen Garg# Zubeen Da# AssamMusic कल्चरल icon(( homage by Sneh Premchand))

Jubin Cultural Icon was not only a singer he was great human being,a legend & legend never dies They stay in people's heart for ever a singer,musician,actor & public voice  38000 songs,40 languages but he remained connected to his roots like a real hero

Zubeen Garg# Aasam Singer# musician लम्हे की खता बनी बरसों की सजा(( thought by Sneh Premchand))

शब्द मौन हैं भाव स्तब्ध हैं  कोई बहुत ही खास हौले से निकल गया जिंदगी के रंगमंच से, फिजा भी है आज उदास उदास

Zubeen Garg# Aasam Singer जुबिन मात्र एक नाम नहीं(( thought by Sneh Premchand))

आज जन्मदिन है इनका

सच में मां जैसा कोई और नहीं

चलो ना मन(( भगति भाव स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

बांसुरी बजाने वाले हाथ वक्त पड़ने पर सुदर्शन भी चला लें,वे कृष्ण हैं अपनी परिस्थिति और अपने परिवेश को कभी ना कोसने वाले,कर्मों से भाग्य बदलने वाले कृष्ण हैं सर्व सामर्थ्यवान होते हुए भी जो महाभारत युद्ध में अर्जुन के सारथि बन पांडवों का मार्ग दर्शन करते हैं, वे कृष्ण हैं युद्ध रोकने की हर संभव कोशिश करते हुए जो शांति दूत बन मात्र 5 गांवों की पांडवों के लिए दुर्योधन से गुजारिश करते हैं,वे कृष्ण हैं मात पिता छूटे,बाल सखा छूटे,राधा छूटी,जन्मस्थान छूटा,क्या क्या नहीं छोड़ना पड़ा कृष्ण को पर कभी कर्तव्य और विवेक का दामन नहीं छोड़ा और ना ही कर्ण की भांति कभी हालत और हालातों को कोसा,निज प्रयासों से बेहतरीन करने की आजीवन कोशिश की, वे कृष्ण हैं प्रेम पाने का ही नाम नहीं है अपने और राधा के उदाहरण से प्रेम की नई परिभाषा लिखने वाले कृष्ण हैं प्रेम का इससे सुंदर कोई उदाहरण नहीं, अक्स देखती है राधा दर्पण में अपना और उसे अक्स कान्हा का नजर आता है राधा की श्वास, मीरा की भगति और रुक्मिणी का सिंदूर हैं कृष्ण देवकी का अंश,यशोदा की धड़कन हैं कृष्ण सुदामा संग मित्रता निभा कर मित्रता के सच्चे पर...