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कैसे वृद्धाश्रम भर रहे हैं

भाग्य की बात

पिता कभी थकता नहीं(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा)

आपका नाम भी लिया काम भी लिया,आपसे सीखा सहजता और कर्मठता का सार तन्खाह तो तन ही खा जाता है अच्छा जीवन यापन करने के लिए कुछ और भी पड़ता है करना, कहते थे हर बार एक युग का अंत हो जाता है सच पिता के जाने के बाद सहजता दामन चुराने लगती है चित से जब भी पापा आते हैं याद जीवन जीया अपनी ही शर्तों पर पर कर्म करने से कभी मानी नहीं हार

जन्मदिन की बहुत बधाई

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