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सब कहती है स्नेहांजलि

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कायनात की रज़ा

एक नायाब सा फूल(( श्रद्धांजलि स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

**उम्र छोटी पर कर्म बड़े** यही परिचय है उनका,क्या क्या करूं उनका गुणगान युग आयेंगे युग जाएंगे व्यक्ति नहीं विचार थे भगत सिंह जोश जज़्बा जुनून उनका रहा परिधान

तिरंगा

गणित कमजोर था मेरी मां का

समझ लेना आजादी आ गई

**आजादी का मतलब मात्र परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त होना ही नहीं है,इसका व्यापक अर्थ देखें तो समझ आता है आजादी का अर्थ है अपने आपको किसी भी चीज़ का गुलाम ना बनने देना,जैसे व्यसनों का,मोबाइल के आवश्यकता से अधिक उपयोग करना** **आजादी का अर्थ है जिम्मेदारी की भावना को थोपा ना जाए बल्कि खुद आगे बढ़ कर जब हम सत्कर्म करें जिससे मात्र अपना ही नहीं परिवार,समाज,देश और विश्व का भला हो,यही आजादी है** **आजादी का एक अर्थ यह भी है जिन लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बिना आजादी की लड़ाई में अपने प्राणों की हंसते हंसते आहुति दी,उनके बलिदान की महत्ता को हम समझें कि यूं हीं नहीं मिली आजादी,जाने कितने वीरों ने भारत मां की रक्षा हेतु अपने प्राण गंवाए हैं,उनके परिवारों के लिए हमारे भीतर एक संवेदना हो,सहयोग करने की प्रवृत्ति हो,यही आजादी है** **आजादी के मायने यह कदापि नहीं होते हम जो जी चाहें करें, जो जी चाहें वही बोलें,जैसा जी चाहें कपड़े पहने,जो भी करें मर्यादा में रह कर और यह सोच कर कि मैं जो भी बोल रहा हूं उसका क्या परिणाम होगा,कहीं मैं मन,वचन वाणी से कोई ऐसा कर्म तो  नहीं कर रहा जो दूजे का मन दुखी हो*...

जन्मदिन मुबारक