Skip to main content

Posts

जुग जुग जीयो भारत मां के लाल स्मित माच्छर(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

Recent posts

जाने कब आ जाए जीवन की शाम

स्वच्छ भारत अभियान

*स्वच्छ भारत,सुंदर भारत,स्वस्थ भारत ऐसे हो हमारे राष्ट्र की जग में पहचान* *भारत सरकार द्वारा चलाया गया है  स्वच्छता का *स्वच्छ भारत अभियान* *शुरुआत हुई थी इसकी 2 अक्टूबर 2014 को, हो जन जन को उसका समुचित ज्ञान* *इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है स्वच्छता के बारे में जागरूकता बढ़ाना,जो देता दस्तक दिल पर,करता जेहन में बसेरा,छोड़ता चित में पक्के निशान* स्वच्छता मजबूरी नहीं आदत बन जाए हमारी,इस संदर्भ में हमसे बहुत आगे है जापान स्कूल के बाद बच्चे स्वयं करते हैं कक्षा साफ अपनी,  राष्ट्र प्रेम का यह आदत लाती पैग़ाम *स्वच्छ भारत,सुंदर भारत,स्वस्थ भारत ऐसे हो हमारे राष्ट्र की जग में पहचान* *महात्मा गांधी जी* को समर्पित है यह अति खास प्यारा सा खास अभियान जिसके तहत गांव,शहरों,कस्बों,हर गली,कूचों,गलियारों की सफाई पर दिया जाता ज़ोर है,सफाई का करता आह्वान करें संकल्प और करें कर्म  गर प्रतिबद्धता से,  दुर्गम राहें  हो जाएंगी आसान स्वच्छता और स्वास्थ्य का चोली दामन का साथ है,  इस अभियान के मूल में  * जन कल्याण* खुले में शौच की समस्या का उन्मूलन करना मुख्य लक्ष्य है इस अभियान...

समझ लेना राम राज्य आ गया(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा *राघव गाथा अंश*))

आज जन्मदिन है जिनका

आज जन्मदिन है इनका, आए इनके जीवन मे सदा बहार मिले खुशी,सफलता,सुख,समृद्धि  और मिले हम सब का प्यार *रोहिल्लास* और *कुमार्स* की नन्ही कली तुम, तुमसे घर का आँगन गुलज़ार करते थे,करते है,करते रहेंगे  तुम्हे प्यार हम सब बेशुमार कबूल करो आज दुआएँ हमारी, देखो दुआओं से सज रहा संसार मनहर तुम्हारी मोहिनी सूरत, लगते अति सुंदर दीदार करता है मन करें प्रकट, ऊपरवाले का आभार आई जो तुम आँगन में हमारे, समा हो गया है गुलज़ार महकती रहना,चहकती रहना, प्रेम ही हो जीवन का आधार समय तो निश्चित रूप से लेगा  लाडो अँगड़ाई,  पर कभी पनपे न कोमल चित्त में   तेरे कोई भी विकार हमारी जान की जान हो तुम निभाना उत्तम अपना हर किरदार ओ मेरी लाडो बिटिया रानी, खिले ऐसा पौधा मन मे तुम्हारे, जाने जो करुणा,सहयोग, अहिंसा और परोपकार लम्हा लम्हा बीत गए बरस 16 *ब्यूटी विद ब्रेन* तेरे व्यक्तित्व का सार मैं ही नहीं प्रकृति भी दे जाए तुझे तेरे जन्मदिन पर उपहार *धरा* दे जाए धीरज अपना *अम्बर* अन्नत ऊंचाई का गहन विस्तार *पर्वत* दे जाए अडिगता अपनी *पवन *गति से करवाए साक्षात्कार *सागर*दे जाए गह...

राम ही राम पुकारेंगे

कुछ लोग