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हनुमान जन्मोत्सव

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हनुमान जन्मोत्सव विशेष(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

पृथ्वी दिवस

स्वच्छ धरा हो स्वच्छ हो अंबर

सवारो धरा को

आए तुम याद मुझे

कह सकें हम जिनसे बात दिल की(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

कह सके हम  जिन से बात दिल की, *वही मित्र हैं* हर धूप छांव में  जो संग खड़े हों  *वही मित्र हैं* संवाद और संबंध  जिनसे रहें सदा ही मधुर, *वही मित्र हैं* जब भी हो मुलाकात  उसमे हो बात *वही मित्र हैं* संकोच ना हो जिनसे, *वही मित्र हैं* दिल जिनके संग बच्चा रहे सदा, *वही मित्र हैं* मन आह्लादित और तन पुलकित रहे संग जिनके, *वही मित्र हैं* स्नेह सुमन चित में  खिल जाएं संग जिनके, *वही मित्र हैं* मित्र की परिभाषा  मुझे तो यही समझ में आती है धुंधला होता है जब भी कोई मंजर, मित्र की छवि सब साफ कर जाती है।।