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हे नीरज

है नीरज रही नीरज से तुम इस जग सिंधु मेr रहा सादा जीवन उच्च विचर  कर्म ही असली परिचय पत्र होतेह एक ही नाम।के व्यक्ति होते हैं हजार स्पष्टवादी,शांत सौम्य स्वभाव आपका चित निर्मल।चितवन भी चारु नहीं पनपा जिया में कोई भी विकार पानी सा पारदर्शी व्यक्तित्व आपका नहीं पनपा चित में कोई भी विकार दिया स्नेह और की परवाह अपने अभिकर्ताओं की,

पिता है तो चिंता फिर किस बात की

वो गले भले ही ना लगाए बच्चों को, पर दिल में सदा के लिए बसाता है जिंदगी की हर बारिश में पिता हर बार छाता बन जाता है सुरक्षा सहजता स्नेह सम्मान का पिता बच्चों का नाता है मां पर तो बहुत चलती है लेखनी, पर पिता पर आकर लेखक भी ढीला पड़ जाता है।। पर ये क्यों भूल जाते हैं हम??? *मां का रौब और रुतबा पिता से ही मुस्कुराता है* मुझे तो पिता के चेहरे में,  ईश्वर का अक्स नजर आता है।। *कभी मीठा कभी खारा है पिता* *डग मगाते कदमों का सहारा है पिता* *धीरज,सुरक्षा,पोषण,पालन, अनुशासन है पिता* *सच में निष्पक्ष सा प्रशासन है पिता* *छोटे से परिंदे का पिता खुला सा आसमान है* *सच में साया है पिता का जिस के सिर पर,वो धनवान है* *राग है अनुराग है पिता* *सच जीवन का मधुर सा साज है पिता* *मां की बिंदी,सिंदूर,सुहाग है पिता* *मां का रुतबा, रौब,अधिकार है पिता* *पिता बिन तो हर बचपन अनाथ है* *पिता बिन हर सांझ सच में बांझ है* पिता कहीं नहीं जाते,जग से जाकर भी जीवित रहते हैं हमारे विचारों में पिता तो पिता ही होते हैं नहीं मिला करते ऐसे नाते बाजारों में।। *पिता है तो मुस्कुराते रहते हैं अधिकार* *पिता है तो जिम...

चिंता नहीं चिंतन ज़रूरी है

अरदास(( श्रद्धांजलि)22/01/2026

कर बद्ध हम कर रहे परमपिता से यह अरदास मिले शांति दिव्य दिवंगत आत्मा को, है प्रार्थना ही हमारा प्रयास कब है बदल जाता है था में, हो ही नहीं पाता विश्वाश माटी मिल गई माटी में , हैं गिनती के सबके श्वास एक सांस भी नहीं मिलता उधार, चाहे लगा लो कितने ही कयास *आया है सो जाएगा* सफर से ही मंजिल बनती है खास जिंदगी एक किराए का घर है  एक दिन करना पड़ता है खाली,गवाह हैं इसके धरा आकाश हमारी शिकायतों हमारी नाराजगी की उम्र हम से लंबी ना हो, इस सत्य का हो सबको आभास *क्षणभंगुर से इस जीवन में हो ही नहीं सकता स्थाई निवास* मिले शांति दिव्य दिवंगत आत्मा को, है प्रार्थना ही हमारा प्रयास *प्रताप जी का प्रताप बना रहा आजीवन* *रहा चित में सदा प्रेम का वास* निज चरणों में दे ईश्वर उन्हें स्थान अब, *पूर्ण हो गए तन के श्वास* मात तात ही होते हैं इस जग में जो अज्ञान के अंधेरे से निकाल दिखाते हैं ज्ञान का प्रकाश मात तात ही हमें अपने से भी आगे  बढ़ते चाहते हैं देखना, करते हैं अपना हर संभव प्रयास कर्म करने की सदा देते हैं प्रेरणा उच्चारण नहीं आचरण का निरंतर करते हैं अभ्यास हमसे हमारा परिचय करवाते हैं मात पिता, हम...

मित्र वही

*मित्र वही जो आशंकित चित को सहज बना दे* *मित्र वही जो जीवन चमन में  हटा कांटे स्नेह सुमन खिला दे* *मित्र वही जो निरस्त नहीं दुरुस्त करने में रखे विश्वास मित्र वही जो महसूस करा दे हो आप उस के लिए अति खास* *मित्र वह जो जज ना करे जलील ना करे,मित्र वही जो सुख दुख में बने एक सुखद अहसास* मित्र वही जो भले ही जाने राज सारे हमारे,पर राज को राज ही रहने दे,कभी किसी के आगे ना खोले बिन कहे ही समझ जाए दिल की बेशक लब हमारे कुछ ना बोलें *मित्र वही जो चित में आनंद का अनहद नाद बजा दे मित्र वही जो बिखरे बिखरे से मन के प्रांगण को हर्षोल्लास से सजा दे* *मित्र वही जो मावास में पूनम का चांद खिला दे  मित्र वही जो आहट मन को राहत  दिला दे* *हर ले चित से हर चित चिंता,चेन की शीतल बयार चला दे मित्र वही जो रेगिस्तान में हरियाली ला दे* *उलझी उलझी सी राहों को बड़ी सरलता से सुलझा दे मित्र वही जो सुख संग दुख भी कर ले साझे,राग द्वेष जड़ से मिटा दे* *संवाद संबोधन रखे सदा मधुर जो, मौन से भी दिल की बात बता दे सलाह मशवरा दे सदा सही वो, हो गांठ कहीं तो सुलह करा दे* *मित्र वह जो स्नेह संग दे सम्मान सदा हो गलती त...

उत्सव हो सबका जीवन