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संकल्प प्रतिबद्धता ही हैं सच्चे गुरु

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मुबारक मुबारक जन्मदिन मुबारक(( दुआ स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

**कुछ लोग जेहन में ऐसे बस जाते हैं, जैसे बच्चे घर में घुसते ही मां को आवाज लगाते हैं**  *दिल पर देते रहते हैं दस्तक, जगह से भले ही दूर चले जाते हैं* *रोज मुलाकात भले ही ना हो उनसे, पर जब भी होती है मुलाकात होती है बात उसमें, दिल में खुशी के दीये बिन माचिस के जल जाते हैं* *न कोई गिला,ना कोई शिकायत, ऐसे रिश्ते भाग्य से ही बन पाते हैं* *मैने सम्भाल कर रखे हैं दिल की तिजौरी में वे अनमोल से पल, जो जीवन के किसी मोड़ पर  हमने साथ बिताए थे जी चाहता है करवा लूं एफ डी उनकी, हम संग संग कितना हर्षाए थे ब्याज रूप में महसूस करूं वह अनुभति, जिससे दिल के नाते गहराए थे* *जब भी देखती हूं पीछे मुड़ पर,  वे लम्हे अहसास सुखद दे जाते हैं कुछ लोग जेहन में ऐसे बस जाते हैं जैसे सावन भादों में कोयल पपीहे मन में हूक मचाते हैं* *कुछ साथ होते ही ऐसे हैं, फेविकोल के जोड़ से मजबूती से चिपक जाते हैं* *दिल के नाते भी बहुत गहरे होते हैं ये सपनों में भी बिन बुलाए दौड़े चले आते हैं* *कौन है सनी?? जब पूछा किसी ने मुझे वे गुजरे लम्हे किसी रील की भांति चलते नजर आते हैं* जिस दिन *पा* गए  सनी मेरे...

श्रद्धांजलि

श्रद्धांजलि बहन और बेटी के दिल से((7/9/2026)

धरा पर रह कर छूना आता था तुझे आकाश सपने बड़े देखे और प्रयास किए शिद्दत से,संकल्प खुद ही चल कर आ गया सिद्धि के पास चुनौती को अवसर बनाने में महारथ हासिल थी दोनों को ही, आलस्य कभी नहीं आया दोनों को रास पापा भी कैसे भरी दोपहरी में गेहूं लेने गांव गांव जाते थे आमदनी बढ़ाओ खर्चे ज़रूरी हैं जो वे करो,अक्सर हमें समझाते थे 9 जनों की भरी पूरी गृहस्थी बड़े प्रेम से चलाते थे ताशों की बाजी जीत जाने पर कितना खुल कर मुस्कुराते थे सीखने को बहुत है उनकेे जीवन से, बिन पा के मां कैसे कर पाती हम सब का विकास करबद्ध हम कर रहे परमपिता से यह अरदास मिले शांति दोनों ही दिव्य आत्माओं को,है प्रार्थना ही हमारा प्रयास परिस्थिति को कभी मनःस्थिति पर हावी ना होने दिया मां जाई ने, धरा पर रह छू लिया आकाश वह है नहीं,नहीं होता यकीन,विश्वाश को भी नहीं आता विश्वाश एक हूक सी उठती है सीने में, कितना सुखद होता था उसके होने का आभास *हानि धरा की लाभ गगन का* यही उसके बिछौडे का है सार बखूबी जानती भी थी मानती भी थी प्रेम ही हर नाते का आधार उम्र छोटी पर कर्म बड़े सपनों को दे गई आकार कुछ लोग जग से भले ही चले जाएं पर जेहन से जाते नहीं...

जन्मदिन मुबारक

कड़वा है मगर सत्य है

व्यक्ति विशेष