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प्रतिस्पर्धा में नहीं प्रतिबद्धता में हैं राम

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धैर्यवान रहे आजीवन श्री राम

भगत वत्सल हैं श्री राम

राम नाम अति मीठा है

हो उदित भोर फिर आशा की(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

*हो उदित भोर फिर आशा की मिटे नैराश्य का अंधकार* *राम नाम अति मीठा है करके देखो इसे दिल से प्यार* *अंतर्मन के गलियारों में,  जब भी विचरण करने जाओगे राम नाम के हीरे मोती  वहां से निकाल  कर लाओगे* *धर्म,सत्य होते हैं विजयी सदा उच्चारण नहीं आचरण में इसे अपनाओगे* *सही मायने में अर्थ दिवाली का  तभी समझ तुम पाओगे* मन में दीप प्रज्वलित होंगे आशा के संकल्प मिलेगा सिद्धि से हर बार *हो उदित भोर फिर आशा की, मिटे नैराश्य का अंधकार* *सिया लखन संग राम की मूरत  चित में अपने धरनी होगी  हो मन में गर कोई विकार तो, चितभूमि निर्मल करनी होगी* *हुआ बहुत अब करो चित निर्मल सही मायने में होगी जय जयकार* *हो उदित भोर फिर आशा की मिटे नैराश्य का अंधकार* *काम क्रोध मद लोभ मोह सच में लाते हैं अंधकार* *भाई भाई के लिए जहां छोड़ देता है राजपाठ, वहां सच्ची रामायण के होते दीदार* *भाई जहां भाई को सुई की नोक समान नहीं देता भूमि, महाभारत होने को सदा रहेगी तैयार* *अंतर रामायण और महाभारत में आए समझ अब, विवेक सत्कर्मों का करेगा वहां श्रृंगार* *राम को देखो,राम को जानो,राम को समझो कैसे परि...

सुमिरन कर ले राम नाम का(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

*सुमिरन कर ले राम नाम  का जीवन सफल बनाएगा* तेज में होगा*दिनकर*सा तू चमक दमक सा जाएगा सुमिरन कर ले राम नाम का,. चित निर्मल हो जाएगा शीतल होगा तू *चंद्र*सा सब शीतल हो जाएगा मोहक होगा तेरा मुखड़ा *कामदेव*बन जाएगा सुमिरन कर ले राम नाम का जीवन सफल बनाएगा ऐसा परिवर्तन होगा तुझमें तू सोच सोच चकराएगा मन की शुद्धि हो जाएगी मन पावन हो जाएगा हर राह सरल हो जाएगी तेरा मन मंदिर बन जाएगा सुमिरन करले राम नाम का चित निर्मल हो जाएगा सुख भोगेगा इंद्र से बंधु हरिश्चंद्र बन जायेगा आए चाहे जो भी बाधा सत्य पथ अपनाएगा ऐसी कृपा नाम राम की, सारा समझ में आएगा सुमिरन कर ले राम नाम का अंधकार मिट जाएगा मावस बन जाएगी पूनम उजियारा मुस्काएगा मान सम्मान में तू *गणेश* सा, पल भर में बन जाएगा अंतर्मन के गलियारों में, राम नाम सुन पाएगा लागी लागेगी राम नाम की, कुछ और लगा नहीं पाएगा *सुमिरन कर ले राम नाम का जीवन धन्य हो जाएगा लेगा जब भी नाम राम का, चित पावन हो जाएगा धरा पर रह कर सच में तू, अम्बर को छू जाएगा एक भी गुण तू राम जीवन का, सच में तू अपनाएगा क्यों आया था इस चोले में, सत्य यह जान तू पाएगा सुमिरन कर ले नाम राम का, ...

खोजोगे तो मिल जाएंगे रघुपति राघव राजा राम((स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

खोजोगे तो मिल जाएंगे  *रघुपति राघव राजा राम*  रामशरण में आजा पगले, *राम ही तीर्थ राम ही धाम* खोजोगे तो मिल जाएंगे, *रघुपति राघव राजा राम* मन की आँखें खोल जरा तूं, दिख जाएंगे प्यारे राम राम की भगति में कितनी है शक्ति, बतला देंगे तुझे हनुमान खोजो गई तो मिल जाएंगे, *रघुपति राघव राजा राम* श्रद्धा होगी गर शबरी सी, खुद चल कर आएंगे राम झूठे बेरो को बड़े प्रेम से, भोग लगाएंगे श्रीराम जन्म सफल होगा शबरी सा,  हो इस सत्य को,लो तुम जान खोजोगे तो मिल जाएंगे, *कौशल्या नंदन* प्यारे राम *बजरंगी*सी होगी जो भगति,  चित में नजर आएंगे राम सिया सुधि लाए,संजीवनी लाए भाई लखन के बचाए प्राण स्मरण कराई जो शक्ति उनकी *सागर लाँघ गए हनुमान* खोजोगे तो मिल जाएंगे, *रघुपति राघव राजा राम* मर्यादा गर होगी चित में तो,  लंका विजय कर देंगे राम राम ही युक्ति,राम ही मुक्ति *राम के दिल में बसे हनुमान* राम ही दिल है राम ही धड़कन राम करें तेरे पूरण काम खोजोगे तो मिल जाएंगे, *रघुपति राघव राजा राम* भ्रातृ प्रेम हो गर लक्ष्मण सा, सदा संग में रखेंगे तुझे राम भाव रखेगा जो केवट सा  चित में, भव ...