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मां और मां जाई को समर्पित यह राघव गाथा

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शांत वन में मौन संवाद

राघव कृपा और नन्हा समर्पण

तभी मिलेंगे राम(स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा)

भय बिन होय न प्रीति

जब राम से मिलने आए भरत

मर्यादा का नित नित पाठ पढ़ाते राम( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा)