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हर रंग कुछ नहीं बहुत कुछ कहता है

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होली आ गई

इस बार की होली में

कुछ लोग जेहन में

कुछ लोग जेहन में ऐसे बस जाते हैं जैसे बच्चे घर में घुसते ही मां को आवाज लगाते हैं

कर्मभूमि के रंगमंच पर

गर तुम साथ हो(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

*हर" सफर हो जाता है आसान*            " गर तुम साथ हो" *हर समस्या का मिल जाता है समाधान*              "गर तुम साथ हो" *हर तूफान में मांझी को मिल ही जाती है पतवार*               *गर तुम साथ हो* *हर धुंधलाया मंजर हो जाता है साफ*              "गर तुम साथ हो" *हर अग्निपथ बन जाता है सहज पथ*              "गर तुम साथ हो" *हर भूल भुलैया में मिल ही जाती है राह*                "गर तुम साथ हो" *हर पल बन जाता है उत्सव*              *गर तुम साथ हो* *हर दिन होली हर रात है दीवाली*             *गर तुम साथ हो* *हर तमस बन जाता है उजियारा*             "गर तुम साथ हो" *हर सुर को मिल जाती है सरगम*             "गर तुम साथ हो" *हर संकल्प की हो जाती है सिद्धि*     ...

मुबारक मुबारक जन्मदिन मुबारक