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और कहीं फिर क्यों हो जाना(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

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और कहीं फिर क्यों हो जाना

मौन शांति भी मौन शोर भी(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

जहां परवाह नहीं,वहां प्रेम नहीं

जहां परवाह नहीं, वहां प्रेम नहीं जहां दया नहीं, वहां प्रेम नहीं जहां मधुर वाणी नहीं,वहां प्रेम नहीं जहां अपनत्व नहीं,वहां प्रेम नहीं जहां कटाक्ष हैं, वहां प्रेम नहीं मलिन मनों में जहां धुंध कुहासे हों वहां प्रेम नहीं जहां दिखावा है, वहां प्रेम नहीं जहां लाभ हानि के मापदंड नातों पर हावी हो जाएं,वहां कतई प्रेम नहीं जहां संवेदना नहीं, वहां प्रेम नहीं और जहां प्रेम ही नहीं,वहां जाना ही क्यों हो???? प्रेम सीखना हो तो  एक बार एक ही पेज *स्नेहांजलि* का और एक पेज *हानि धरा की लाभ गगन का* में से पढ़ लेना,दोनों ही प्रेम की पराकाष्ठा प्रेम से पूरा जीवन जी गई,मंत्र और ग्रंथ सी दोनों ही किताबें प्रेम की बारहखड़ी अच्छे से समझा देंगी,इसमें 11 स्वर और 33 व्यंजन भी प्रेम के ही हैं,भाव प्रेम के,शब्द प्रेम के,लहजे प्रेम के सब प्रेममय **प्रेम हो जब परिवार में फिर क्या रखा है बाकी संसार में**

और कहीं फिर क्यों हो जाना(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

क्षणभंगुर से इस जीवन में प्रेम अपनाओ

जीवन कितना *क्षणभंगुर*है… इस क्षण भंगुर से जीवन में हम स्थाई भौतिक सुख चाहते हैं, इसे विडंबना कहते हैं,याद रहे ना जाने कब किसका साथ छूट जाए, ना जाने कब कौन सी मुलाक़ात आख़िरी हो जाए,कुछ नहीं पता *क्या छिपा वक़्त के पन्नों में ना तुम जानो ना हम जाने* इसलिए जब तक हम एक-दूसरे के साथ हैं, तब तक एक दूसरे की परवाह करें, देखभाल करें, सम्मान करें एक दूसरे को प्रेम दें, साथ दें,सहयोग दें और जहाँ संभव हो, किसी के जीवन को थोड़ा सहज और सुंदर बनाने का प्रयास करें,परवाह प्रेम का ही पर्याय है जीवन के इस पड़ाव पर आकर सोचती हूँ ..क्या तेरा, क्या मेरा? जिसके लिए हम जीवन भर इतना जोड़ते, सँभालते और कभी कभी लड़ते रहते हैं, उसमें से आखिर हमारे साथ क्या जाएगा? न धन जाएगा, न वस्तुएँ, न पद, न प्रतिष्ठा… साथ जाएगा तो केवल हमारे कर्मों का भाव और हमारे द्वारा बाँटा गया *प्रेम* फिर इतनी हाय-हाय क्यों? इतना मेरा-तेरा क्यों? क्यों न शेष जीवन को थोड़ा और सरल बना लें,विशेष बना लें मन में किसी के लिए कटुता न रखें, जहाँ संभव हो क्षमा करें,जहाँ जरूरत हो हाथ थामें और जहाँ अवसर मिले प्रेम बाँटें  क्योंकि अंत...

कुलदीपक की ढेर बधाई