*अंजु अंजु*करते हो तुम, क्या अंजु से कभी बन पाओगे?? उतनी समझ,स्नेह,विनम्रता,ज्ञान कहो कहां से लाओगे?? प्रीत की रीत निभाई सदा उसने क्या तुम भी निभा उसे पाओगे?? अंजु अंजु======कभी बन पाओगे?? परमार्थ की राह चुनी उसने, क्या सच में तुम भी चुन पाओगे?? जहां स्वार्थ की धूप खिलेगी, तुम तत्क्षण ही मुड़ जाओगे पग पग पर जिंदगी लेती रही परीक्षा क्या ऐसी परीक्षा तुम दे पाओगे??? परिस्थित को हावी न होने दिया मनःस्थिति पर, क्या तुम भी ऐसा कर पाओगे??? सदा रही मर्यादित बहना क्या तुम मर्यादित रह पाओगे *साधन संसाधन*भले ही कम रहे आरंभिक जीवन में, क्या फिर भी उसके जैसी सच्ची साधना कर पाओगे??? किसी अभाव का प्रभाव न होने दिया लक्ष्य प्राप्ति पर, क्या अभावग्रस्त हो कर उसके जैसा लक्ष्य साध तुम पाओगे?? विषम परिस्थितियों में भी न छोड़ा आशा का दामन, क्या उसके जैसे संकल्प को सिद्धि से मिला तुम पाओगे??? भले ही शूल रहे हों जीवन पथ पर,क्या फिर भी उसके जैसे सुमन से खिल पाओगे??? *सद्गुण* बन गए थे मित्र उसके, विकारों से नहीं कोई नाता था, कितना भी बड़ा हो कोई भी प्रलोभन,मां जाई को कभी नहीं लुभाता था, भौतिकता की ...