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गुजारिश(( मात पिता पर कविता स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

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मां पापा से होता है पीहर( विचार स्नेह और सुमन प्रेमचंद द्वारा))

माँ पापा से ही होता है पीहर और मायका  वो नहीं रहते तो तो मिलता नहीं घर जाने में ज़ायक़ा ..  खो जाता है वो घर वाला सुकून और चैन  जहां बचपन के बीते अनेकों दिन रैन  माँ सा मिलता नहीं कोई कहीं  बस मन में रह जाती हैं सब यादें बसी  जब वो थे तो लगता था हमेशा ही रहेंगे  अब नहीं हैं तो ढूँढता है मन …  जबकि जानती हूँ कि अब वो कहीं नहीं मिलेंगे  समेटे उनकी यादों को अपने अंदर  चल रही हूँ जैसे लिए अपने भीतर एक समंदर  यूँ तो खामोशी सी छाई है मुख पर  पर दिल की गहराइयों में पल रहा है बवंडर

fathers day

फादर्स डे है पर फादर नही हैं पापा का होना  होता है कुदरत का बहुत बड़ा उपहार। सब्ज़ी में नमक होना खास बात नही,पर नमक न होना बहुत खास है,ऐसा ही होता है पापा का किरदार। सच मे पापा आप बहुत खास थे। जीवन मे सुरक्षा और अनकहे प्रेम का समुचित विकास थे। कोई भी आप की कमी कभी भी नही कर सकता पूरी। दिल चाहता ही नही कभी,पर एक दिन सहनी पड़ती है ये दूरी।।

शब्द भले ही छोटा हो ए एस

ट्रेन से तेरे वजूद के आगे

आसान है कमी निकालना

उपहार मात्र उपहार नहीं