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भेज रहा हूं स्नेह निमंत्रण

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एक सा परिवेश एक सी परवरिश(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

एक सा परिवेश एक सी परवरिश पर किस्मत चारों ने अलग अलग पाई मां की मेहनत और कर्मठता सच में एक दिन रंग लाई अपने सामर्थ्य से अधिक किया मां ने   आज सोचा तो बात समझ में आई कर्म बदल सकता है भाग्य मां आचरण में बात ये लाई कभी रुकी नहीं कभी थकी नहीं अभावों की नहीं दी कभी दुहाई मित्र सी रही मां तूं हमारी सच हम चारों रही तेरी परछाई हम सरगम तूं सुर रही मां हर मोड़ पर तेरी याद आई

गुजारिश(( मात पिता पर कविता स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

एक गुजारिश है आपसे मैने की है जो गलती वो आप जीवन में कभी ना दोहराना कभी ना पूछना मात पिता से आपने हमारे लिए किया ही क्या है यह कह कर दिल ना उनका कभी दुखाना हमारे सपनों के लिए अपनी जरूरतें भी कर देते हैं कुर्बान वे, कभी कोई मलाल ना उनके लिए तुम चित में लाना यथासंभव हर कोशिश करते हैं हमारी सुख सुविधाओं के लिए वे जीवन का सबसे सुंदर तराना प्रेम,परवाह,अपनत्व का मात पिता होते हैं खजाना सबसे धनवान वही जगत में जिसने समय पर सत्य ये जाना

मां पापा से होता है पीहर( विचार स्नेह और सुमन प्रेमचंद द्वारा))

माँ पापा से ही होता है पीहर और मायका  वो नहीं रहते तो तो मिलता नहीं घर जाने में ज़ायक़ा ..  खो जाता है वो घर वाला सुकून और चैन  जहां बचपन के बीते अनेकों दिन रैन  माँ सा मिलता नहीं कोई कहीं  बस मन में रह जाती हैं सब यादें बसी  जब वो थे तो लगता था हमेशा ही रहेंगे  अब नहीं हैं तो ढूँढता है मन …  जबकि जानती हूँ कि अब वो कहीं नहीं मिलेंगे  समेटे उनकी यादों को अपने अंदर  चल रही हूँ जैसे लिए अपने भीतर एक समंदर  यूँ तो खामोशी सी छाई है मुख पर  पर दिल की गहराइयों में पल रहा है बवंडर

fathers day

फादर्स डे है पर फादर नही हैं पापा का होना  होता है कुदरत का बहुत बड़ा उपहार। सब्ज़ी में नमक होना खास बात नही,पर नमक न होना बहुत खास है,ऐसा ही होता है पापा का किरदार। सच मे पापा आप बहुत खास थे। जीवन मे सुरक्षा और अनकहे प्रेम का समुचित विकास थे। कोई भी आप की कमी कभी भी नही कर सकता पूरी। दिल चाहता ही नही कभी,पर एक दिन सहनी पड़ती है ये दूरी।।

शब्द भले ही छोटा हो पर भाव बहुत ही गहरा है((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

ट्रेन से तेरे वजूद के आगे