आभार राघव गाथा के सृजन में मुझे समस्त चराचर की शक्तियों का आभार प्रकट करना है जिन्होंने मेरे चिंत में राम भगति का अंकुर प्रस्फुटित किया और अपनी अनुभूतियों को मैं अभिव्यक्ति दे पाई, मुझे आभार प्रकट करना है मेरी दिवंगत बहन *अंजु कुमार* का जो बहुत बड़ी हनुमान भगत थी, एक चुंबकीय व्यक्तित्व की स्वामिनी,जिसका अंतर्मन हनुमान भगति से लबरेज था, तब से ही मन में राम जी पर लेखनी चलाने का विचार आया, आभार प्रकट करना चाहेगी *स्नेह लेखनी* अपने मात पिता और गुरूजनों का जिन्होंने अक्षर ज्ञान दिया, आभार प्रकट करूँगी मां सरस्वती का, जिनकी कृपा बिन कुछ भी संभव नहीं,आभार प्रकट करना चाहूँगी उन सभी आत्मीय जनों का,जिन्होंने मुझे निरंतर प्रोत्साहित किया और इस सत्कर्म को साकार करने की प्रेरणा दी,कुछ आभार पृष्ठभूमि में होते हैं जैसे नवनीत जी का जिन्होंनें मुझे घर में सदा ऐसा सृजनात्मक माहौल और सहयोग दिया कि *राघव गाथा* का जन्म हुआ, आभार मेरी बिटिया का जिसने इस किताब में मेरा दिल से साथ दिया,सच में यूँ ही नहीं लिखी जाती किताब,जब भी दिल से मैंने लगा कर देखा हिसाब तो बहुत से चेहरे मेरे जहन में आए, जिनके बहुत ही शीतल ...