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कड़वा है मगर सत्य हैं

दोहराता है

खैरख्वाह thought by snehpremchand

जिन्हें हमारा खैरख्वाह होना चाहिए वही लोग हमें दुख देने की फेरहिस्त में सबसे ऊपर होते हैं,शायद विडंबना की यही सही मायनों में सटीक परिभाषा है।अहसास ए ज़िम्मेदारी उन्हें छू कर भी नहीं जाता।या तो उनकी तरबीयत में कोई कमी रह जाती है,या उनकी अहमकाना सोच इसका कारण होती है।अहसास ए जुर्म हो तो खौफ ए खुदा भी हो।नेकी का आफ़ताब उनके जेहन में कभी नही चमकता।दूसरों के आब ए  चश्म से भी उन्हें कोई सरोकार नही होता।वे हमारी हर बात का समर्थन करें, ज़रूरी नहीं, पर हर हर बात की मुखालफत करें,ये तो कतई ज़रूरी नहीं।।         स्नेहप्रेमचंद आब ए चश्म---आंसू मुखालफत---विरोध