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सपने बुनते बुनते

सपने बुनते बुनते कब लम्हे उधड़ते गए,हो ही नहीं पाया अहसास दौर बदलते गए जीवन में, धूप छांव सी जिंदगी में कभी हलचल कभी सुखद आभास बच्चों ने भेजा केक जब बड़े प्रेम से मेरी आंखों में आ गया हौले से पानी।।

साथ रहे