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तन की सिलाई मन की बुनाई( thought by Sneh Prem chand)

तन की सीलाईयों पर मन की ऊंन से मां तूने तो मुझे ही बुन डाला। क्या लिखूं तेरे बारे में,कुछ समझ नहीं आता इस लेखनी को,तूने तो मुझे ही लिख डाला।। एहसासों को ही बुन दिया तूने,नमूना प्रेम भरा ही बना डाला।।