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Showing posts with the label इजहार

पिता का प्यार

ज़रूरी

ज़रूरी

ज़रूरी तो नहीं

सबको नहीं आता

या तो समझ ही नहीं आया

वाह चित्रकार((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

मां तो कह देती है मन की

जरूरी तो नहीं