Skip to main content

Posts

Showing posts with the label कोई भी रूह

जब भी कोई रूह thought by sneh premchand

जब भी कोई रूह रेजा रेजा हो कर जाती है। पूरी कायनात लगती है सिसकने, प्रकृति भी अपना रौद्र रूप दिखाती है।। कभी सूखा,कभी बाढ़,कभी महामारी के रूप में जलजला लेे आती है।। जब कहीं भी कभी भी बेजुबान,निर्दोष जानवरों पर कटार चलाई जाती है। बेबसी हो जाती है बेबस, बददुआ आह की सरगम गाती है।।        स्नेह प्रेमचंद र