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परिवार

प्रेम

सागर सी

मुलाकातें((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

हकदार((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

हकदार((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

प से प्रेम प से परिवार

प से प्रेम,प से ही होता है परिवार। सौ बात की एक बात है, प्रेम ही हर रिश्ते का आधार।। एक ही वृक्ष के हैं हम फल फूल पत्ते और हरी भरी शाखाएं। विविधता है बेशक बाहरी स्वरूपों में हमारे,पर मन की एकता की मिलती हैं राहें।।

त्रिवेणी

त्रिवेणी

लिटिल स्टार

अच्छे बुरे का मापदंड

बारम्बार

नहीं लेते जन्म

प्रेम

प्रेम ही है हर रिश्ते का आधार

मुलाकातें Thought by sneh premchand

मुलाकातें ही कम हुई हैं,प्यार तो नहीं

मीनार thought by sneh premchand

वो जो मुश्किलों का अंबार है, वही तो मेरे हौंस्लों की मीनार है।।

प्रेम समर्पण और विश्वास

भुरभुरी न हों इसकी दीवार।।।

Poem on parents by sneh premchand

हमारे जन्म से अपनी मृत्यु तक,  जो दिल में हमें बसाते हैं। कोई और नहीं वे प्यारे बंधु,  मात-पिता कहलाते हैं।। ताउम्र बने रहते हैं वे  हमारा आधार  कार्ड और एटीएम कार्ड, हम उम्र के दूसरे पड़ाव में उनका आधार और एटीएम बनने से क्यों कतराते हैं??  बनते हैं जब हम खुद मात-पिता,  तब यह दोहरे आयाम समझ में आते हैं।।           स्नेह प्रेमचंद

Poem on life

कतरा कतरा कटिबद्ध है इस बात का,प्रेम ही हर रिश्ते का  आधार, प्रकृति भी देती है अपनी गवाही, जब अक्सर होता है मौसम खुशगवार।।

परिवार thought by sneh premchand

हमारे अस्तित्व का बहुत बड़ा हिस्सा होता है  परिवार। बिन परिवार के वजूद में आ जाती है दरार।। प्रेम है परिवार,ताकत है परिवार, ग़म,खुशी दोनों का इजहार है परिवार। प्रेम के सुदृढ़ आधार का राज मात्र स्नेह है,और कुछ भी तो नहीं।।        स्नेह प्रेमचंद

अधिकार

किसी को ,किसी को भी कुछ भी कहने का नही होता है अधिकार। प्रेम से सब कुछ हो सकता है वश में,प्रेम हो हर रिश्ते का आधार।              स्नेह