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Showing posts with the label प्रेम ही हर नाते का आधार

क्षणभंगुर से इस जीवन में प्रेम अपनाओ

जीवन कितना *क्षणभंगुर*है… इस क्षण भंगुर से जीवन में हम स्थाई भौतिक सुख चाहते हैं, इसे विडंबना कहते हैं,याद रहे ना जाने कब किसका साथ छूट जाए, ना जाने कब कौन सी मुलाक़ात आख़िरी हो जाए,कुछ नहीं पता *क्या छिपा वक़्त के पन्नों में ना तुम जानो ना हम जाने* इसलिए जब तक हम एक-दूसरे के साथ हैं, तब तक एक दूसरे की परवाह करें, देखभाल करें, सम्मान करें एक दूसरे को प्रेम दें, साथ दें,सहयोग दें और जहाँ संभव हो, किसी के जीवन को थोड़ा सहज और सुंदर बनाने का प्रयास करें,परवाह प्रेम का ही पर्याय है जीवन के इस पड़ाव पर आकर सोचती हूँ ..क्या तेरा, क्या मेरा? जिसके लिए हम जीवन भर इतना जोड़ते, सँभालते और कभी कभी लड़ते रहते हैं, उसमें से आखिर हमारे साथ क्या जाएगा? न धन जाएगा, न वस्तुएँ, न पद, न प्रतिष्ठा… साथ जाएगा तो केवल हमारे कर्मों का भाव और हमारे द्वारा बाँटा गया *प्रेम* फिर इतनी हाय-हाय क्यों? इतना मेरा-तेरा क्यों? क्यों न शेष जीवन को थोड़ा और सरल बना लें,विशेष बना लें मन में किसी के लिए कटुता न रखें, जहाँ संभव हो क्षमा करें,जहाँ जरूरत हो हाथ थामें और जहाँ अवसर मिले प्रेम बाँटें  क्योंकि अंत...

स्नेह की स्नेह भरे चित से स्नेहिल दुआ

सबसे बड़ी दौलत परिवार(( विचार स्नेह सावित्री प्रेमचंद द्वारा))

एक ही वृक्ष के हैं हम  फल फूल पत्ते और हरी भरी शाखाएं विविधता है बेशक बाहरी स्वरूपों में हमारे, पर मन की एकता की मिलती हैं राहें *एक सा परिवेश एक सी परवरिश* पर जिंदगी के एक मोड़ पर होना पड़ता ही है जुदा एक दूजे से, बेशक हम चाहें या ना चाहें सबसे लंबा सबसे प्यारा साथ होता है भाई बहनों का जीवन में, बेशक और कितने ही नए नए नाते जीवन में आएं मात पिता का अक्स नजर आता है भाई बहनों में,बशर्ते कि हम देखना चाहें परिवार मात्र चार लोगों का ही नहीं होता,भाई बहन तो जीवन के आरंभ का पहला परिवार है क्यों ना सरल सी बात समझ में सबकी ना आए सब प्रेम वृक्ष के ही तो पुष्प कलियां हैं महक प्रेम की सभी में एक सी आए हुनर भले ही हों न्यारे न्यारे सब के पर हुनियारे में एक नजर आएं हमारे जन्म से अपनी मृत्यु तक जो दिल में हमें बसाते हैं कोई और नहीं वे प्यारे बंधु *मात पिता* कहलाते हैं  है ना विडंबना ये कितनी बड़ी जो हमें बोलना सिखाते हैं  उन्हीं से हमारे संवाद और संबोधन कम हो जाते हैं बनते हैं हम जब मात पिता तब ये सत्य समझ में आते ह...

मुबारक मुबारक जन्मदिन मुबारक

कुछ कर दर गुजर,कुछ कर दरकिनार

आने वाला हर लम्हा हो खुशगवार

आने वाला हर लम्हा हो खुशगवार मन खुश हो तो हर लम्हा है त्योहार प्रेम,करुणा,सहजता,विनम्रता सदा दें दस्तक तेरे द्वार मन हो जाता है मंदिर, गर सो जाता है अहंकार कुछ कर दरगुजर, कुछ कर दरकिनार यही मूल मंत्र है जीवन का, प्रेम ही हर रिश्ते का आधार मुबारक मुबारक जन्मदिन मुबारक जीवन ज्योति रहे सदा बरकरार