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काश

मां बाप। ((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा)))

Zra sochiye......Jo ma baap bachpan me hme pal bher bhi apni aankhon se ojhal nhi hone dete,ythasambhav her zrurat puri kerte h,hmari khushi se khush or hmari preshani se preshan ho jate h,vhi ma baap vridha avastha me itne upekshit or tanha kyun ho jate h?bahut zruri h sochna or kuch kerna,.......aap kya soch or ker rhe ho?

काश अगर यह बचपन रहता थॉट बाय स्नेह प्रेमचंद

Poem about childhood.मासूम है बचपन by snehpremchand

सुविचार,,,,,,,बचपन भोला है,मासूम है,छोटी छोटी खहवाईशो से भरा है,न जलन है,न लोभ है,खुद को खुद की चिंता भी नही है, न भविष्य की चिंता, न माजी का मलाल। प्यारा है बचपन,सलोना है बचपन।।

महफूज़

महफूज़ सा होता है बचपन जिसके साए तले,वो पापा कहलाते हैं,ऊपर से गर्म,भीतर से नर्म, हर पल सुरक्षा का अहसास कराते हैं।।       स्नेह प्रेमचंद

महफूज़

महफूज़ सा होता है बचपन जिसके साए तले,वो पापा कहलाते हैं,ऊपर से गर्म,भीतर से नर्म, हर पल सुरक्षा का अहसास कराते हैं।।

महफूज़ thought by snehpremchand

महफूज़ सा होता है बचपन जिसके साए तले,वो पापा कहलाते हैं,ऊपर से गर्म,भीतर से नर्म, हर पल सुरक्षा का अहसास कराते हैं।।

मासूम बचपन

 बचपन से पावन,बचपन से मासूम,कुछ भी तो नही होता, चितचिंता नही कोई होती,कोई बच्चा चैन नही खोता।। कितने सुखद से होते हैं लम्हे,पल पल मीठा मीठा अहसास, काश समेट रख पाते इन लम्हों को,बचपन होता सबसे खास।। माँ बाप के रूप में ईश्वर होता हमारे पास।।         स्नेहप्रेमचन्द