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ज़िंदगी एक पहेली poem by snehpremchand

ज़िन्दगी है एक अजब पहेली,मिल जुल कर सुलझानी है। ज़िन्दगी कुछ भी तो नहीं, सच मे तेरी मेरी  कहानी है।। कभी सुख कभी दुख के बादल,कभी धूप कभी छाया सुहानी है। पर बिन प्रेम के ज़िन्दगी सच मे बड़ी वीरानी है।। प्रेम की है एक सखी रूहानियत, वासना मात्र जिस्मानी है। मोहब्बत लेने का नाम नही, मोहब्बत देने की दीवानी है।। ज़रूरी नही मिलन ही हो मोहब्बत में, जुदाई की भी तासीर पुरानी है।।          स्नेहप्रेमचंद