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खीर thought by snehpremchand

प्रेम की कढ़ाई में जब मैंने सौहार्द के चावल और  अपनत्व के दूध की खीर बनाई, इतनी मिठास थी उस खीर में,वैसी अन्यत्र कहीं न पाई।।