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67वा जन्मदिन मुबारक हो एल आई सी(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

भा---रतीय जीवन बीमा निगम का दूसरा नाम है सेवा,सुरक्षा और विशवास र---खा है जिसने स्नेह और सौहार्द सभी से,तभी निगम है अति खास ती---र्थ भी कर्म है,धाम भी कर्म है,इसी सोच से हुआ है सतत विकास य---हाँ, वहाँ सर्वत्र पसारे पाँव निगम ने,अपने अस्तित्व का इसे आभास जी--वन के साथ भी,जीवन के बाद भी,निराशा में भी आशा का किया है वास व---नचित न रहे कोई भी उत्पादों से, इसके,यथासंभव किया हर प्रयास न---भ सी छू ली हैं ऊंचाईयां, आता है धरा के भी रहना पास बी---च भंवर में जब कोई चला जाता है, छोड़ कर,होती है निगम से फिर आस मा---हौल बनाया निगम ने ऐसा,जैसे कुसुम में होती है सुवास नि---यमो को नही रखा कभी ताक पर,हर वर्ग को जोड़ कर खुद से,सतत किया जिसने प्रयास ग---रिमा अपनी रखी बनाई,सबको जीवन मे राह दिखाई,दिनकर से तेज का इसमे वास *संकल्प से सिद्धि तक छिपे हैं जाने कितने ही अगणित प्रयास* म---जबूत हौंसला,बुलंद इरादे,जनकल्याण की भावना का न हुआ कभी ह्रास।।              स्नेहप्रेमचंद

Poem on Father's day

*फादर्स डे है पर फादर नही हैं* पापा का होना  होता है  कुदरत का बहुत बड़ा उपहार। सब्ज़ी में नमक होना खास बात नही,पर नमक न होना बहुत खास है,ऐसा ही होता है पापा का किरदार। सच मे पापा आप बहुत खास थे। जीवन मे सुरक्षा और अनकहे प्रेम का समुचित विकास थे। कोई भी आप की कमी कभी भी नही कर सकता पूरी। दिल चाहता ही नही कभी,पर एक दिन सहनी पड़ती है ये दूरी।।

**हमारा प्यार हिसार**विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा