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Showing posts with the label मन

निर्मल

किताब

उदास

जब बिन कारण

चलो न मन thought by sneh premchand

चलो मन, जहाँ बहती हो जग में पावन प्रेमधारा,चलो मन,जहाँ सच्ची ममता का मिलता हो सहारा,चलो मन,जहाँ न हो बिछोड़ा कोई भारी, चलो मन,जहां भेद भाव की सुलगती न हो कोई चिंगारी,चलो मन,जहां मजबूरी बन जाये अधिकार,चलो मन,जहां हो सिर्फ प्यार ही प्यार

*मन* thought by sneh premchand

धुआं धुआं सा हो जब मन

मन

धुआं धुआं सा हो जब मन

न हो thought by sneh प्रेमचन्द

न मन कभी कैकई सा हो

भरा भरा

हर्षित है मन

हर्षित है मन

चाहत thought by snehpremchand

हम जो देखना चाहते हैं,वही देखते हैं। हम जो सुनना चाहते हैं, वही सुनते हैं। हम जो पसन्द करते हैं, उसी को तवज्जो देते हैं। हम झूठ बोलते हैं  कि समय नही हाल जानने का, हम उसी का हाल पूछते हैं, जिसका पूछना चाहते हैं।।           Snehpremchand

मन कर्म परिणाम thought by snehpremchand

मन के हिसाब से ही कर्म और कर्म के हिसाब से ही परिणाम होते हैं।सारा खेल मनोवृति का है।।                           Snehpremchand