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कोई ऐसा बैंक होता(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

काश कोई ऐसा *बैंक* होता *जहां लम्हे जमा करा पाते* काश कोई ऐसा *एटी एम* होता *जहां से मधुर स्मृतियां  झट से निकाल लाते* काश कोई ऐसी *चेक बुक" होती *जिसमे प्रेम का चेक काट पाते* काश कोई ऐसी *पास बुक* होती, *जिसमे अतीत के लम्हे दर्ज करा जाते* काश कोई ऐसी *एफ डी*होती *जिसमे पैसे नहीं सांसें बढ़ा पाते*