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Showing posts with the label व्यवहार

बहुत ही अलग

अक्सर

आंकलन

जो बात

अच्छा नहीं लगता

अच्छा नही लगता जब आने खास भी बेगानों का स व्यवहार करते हैं। अच्छा नही लगता जब माता पिता अपने ही बच्चों के घर मे मेहमान बन कर रह जाते हैं।

अलग अलग

बहुत ही अलग अलग होता है एकीक और सामूहिक व्यवहार। किसलिए होता है विवेक फिर, गर अंतर का समझ नही आता सार।।

दस्तक thought by snehpremchand

सच में बहुत ही कमजोर है ये रिश्तों की डोर,ज़रा सी लहजे में लरज गई, आई  तल्खियां,तो खो ही जाता है अख्तियार। दूरियां दस्तक देने लगती हैं झ्ट से, बदल जाता है तत्क्षण ही व्यवहार।।           Snehpremchand