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तूं याद आ जाती है

मयस्सर

तदबीर thought by snehpremchand

ए खुदा! जेहन में आ जाए कोई ऐसी तदबीर। सबा बहती है जैसे चमन में, नयनों में जैसे बहता है नीर।। खौफ ए जेहन हो जाए ज़मींदोज़ नेस्तनाबूद हो जाएं मन के सारे विकार। मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना इसी भाव की हर दिल में खिंच जाए तस्वीर।।             Snehpremchand