Skip to main content

Posts

Showing posts with the label स्वार्थ का पलड़ा हो गया है भारी

हर पत्ता अलग होना चाहता है शाख से

हर पत्ता अलग होना चाहता है शाख से स्वार्थ का पलड़ा हो गया है भारी।।।।।। मिलता था चैन जिस माँ की गोद मे, वही बूढ़ी माँ क्यों अब लगती है खारी।। समय का दरिया यूँ ही बहता जाता है। समय पंख लग उड़ जाता है।। । ।। बीत वक़्त नही आता लौट कर, पाछे इंसां पछताता है।।।।    जिसके हर पल में तुम थे,। आज कुछ पल उसको देना क्यों लगता है भारी??? मिलता था चैन जिस माँ की गोद मे वही माँ अब क्यों लगती है खारी?????