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फर्श से अर्श तक का सफर((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

फर्श से अर्श तक का सफर करने वाली,एक हजारों में नहीं करोड़ों में मेरी बहना आज भले ही अपना नश्वर तन छोड़ चली गई हो,पर जेहन से ये ताउम्र कहीं नहीं जाएगी।कुछ खास अहसास ऐसे होते हैं जग में,जिनकी कोई रबड़ नहीं।जब जिंदगी अनुभूतियों से अपना परिचय करवा रही थी,तब वो साथ थी।आज भी वो साथ है,कल भी रहेगी।। हे ईश्वर! उसकी दिवंगत आत्मा को शांति देना। वो जहां भी है शांत रहे।।          स्नेह प्रेम चंद