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Showing posts with the label हौले से

सच की ही डिप्लोमेट निकली

मैंने पूछा

मैंने पूछा भगवान से ,कहाँ है स्वर्ग तो वो मुस्कुरा कर चल दिये। थामा फिर हौले से हाथ मेरा और माँ के पास जा कर रुक गए।।

मैं न भूलूंगी (( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

मैं न भूलूंगी, मैं न भूलूँगी, वो माँ का प्यार से गले लगाना। चुपके से फिर हाथ पकड़ कर, अपने कमरे में  ले जाना। कुछ प्यार के तोहफे निकाल कर, हसरत भरी नजरों से दिखाना। मैं न भूलूँगी मैं न भूलूंगी, मनपसन्द की रसोई बनाना। झट पट से उसका काम मे लग जाना, बिना शिकायत बिन रंजिश के, अपने चमन को माँ का महकाना। मैं न भूलूंगी मैं न भूलूंगी।।

जहां तूं रहती है