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एक ही तो हैं thought by snehpremchand

एक ही है poem by snehpremchand

एक धरा है एक गगन है एक ही तो है ये संसार। एक ही वृक्ष के हैं हम विविध पत्ते,पुष्प और कलियाँ, एक ही ओम एक ओंकार।। खुद पीकर गरल बचाया सृष्टि को नीलकण्ठ भोले बाबा तारनहार।। यही तरबियत है आज के दिन की गरल पीना सीखें फैलाएं नहीं इसी भाव का तिलक करें संस्कार।।