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कुछ दरगुजर,कुछ दरकिनार

ना इकरार करते हैं  न करते हैं इसरार।  यूं तो रह जाएंगे,  हम बीच मझधार।। जमींदोज हो जाएंगी ख्वाहिशें,  दिल हो जाएगा जार जार।।  हमने तो कब का,  कुछ कर दिया दरगुजार,  कुछ कर दिया दरकिनार।।            स्नेह प्रेमचंद