Skip to main content

Posts

Showing posts with the label लेखनी

निहाल

श्यामल

जो कहना चाहें

सुन

याद आई

मां जब भी

चल बिटिया

आज कुछ लिख दे ऐसा

लाग लपेट

लाग लपेट

बखान

A साथ लेखनी आज कुछ,  गोविंद का करेंगे दिल से बखान। पुनरोदय हो फिर से मेरे देस का, बने फिर से मेरा भारत महान।। नारी जाति की रक्षा हेतु, जैसे कान्हा आगे बढ़ कर आये। ऐसी भावना पैदा हो जाये  गर समाज मे, मेरा समाज फिर स्वर्ग बन जाये। धर्म की रक्षा के लिए, दुष्टों के विनाश के लिए, साधु लोगों के भले के लिए, जो जो किया कृष्ण ने, है हम सब को आभास। शायद यही कारण है इतिहास में, कान्हा का व्यक्तित्व सूरज की भांति है बड़ा खास।। साहित्य के आदित्य से जगत में आलोक का आगमन होगा। कान्हा के जीवन करेगा मार्गदर्शन सबका,हर सवेरा फिर सुंदर होगा।।

प्रेम वचन

यह प्रेमवचन मात्र एक पेज नही है,यह तो मेरे दिवंगत माता पिता को लेखनी के माध्यम से एक भावभीनी चलती रहने वाली श्रधांजलि है।कुछ मधुर अहसासों की ऐसी अभिव्यक्तियाँ है,जो शायद आप सब भी महसूस करते होगें।मेरी कोशिश है ये एक छोटी सी,जिसको पूरा करने में आप सब का सहयोग अपेक्षित है,ये केवल मेरे ही नही हर दिवंगत माता पिता को श्रद्धांजलि है,जो जाने क्या क्या,किन किन हालातों में हमारे लिए कैसे कैसे प्रयास करते हैं।शब्दों में वो ताकत नही,जो माँ बाप की महिमा का कर सकूं बखान। न कोई था,न कोई है,न कोई होगा,मात पिता से बड़ा महान।।

Poem on motivation

उठ लेखनी आज कुछ  ऐसा काम करेंगे। भूखे सोते हैं जो मासूम, लोगों से उनके लिए  कुछ करने को कहेंगे। किसी को सूखी रोटी  भी नही है मयस्सर, कोई छपन भोग लगाता है। क्यों इतनी विषमता भरा है ये जग, क्यों इंसा आधी आधी रोटी  नही खाता है। बहुत सो लिए,अब तो जाग लो, हर समर्थ एक निर्बल का हाथ थाम लो, यही होगा सच्चा बैंक बैलेंस तुम्हारा, कर्म ऐसे तुम्हारी रिटर्न भरेंगे ।         Snehpremchand

बहुत तेज

सच सच

सब सच सच कह देती है लेखनी,वही लेखन बन जाता है, भावों को पहना परिधान शब्दों का,मन अजीब सा सुकून पाता है।।

हुनर

हर व्यक्तित्व में है कोई न कोई हुनर, बस तराशने की ज़रूरत है। हर जीवन में है कोई न कोई समस्या, बस समाधान की ज़रूरत है।। हर लेखनी कह सकती है कुछ न कुछ, बस शब्दों को भाव परिधान पहनाना ज़रूरी है।।       स्नेहप्रेमचंद