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मैं ही नहीं,प्रकृति भी दे जाए

मैं ही नहीं, प्रकृति भी दे जाए, तुझे तेरे जन्मदिन पर ढेरों उपहार। सूरज दे जाए तेज अपना, चाँद शीतलता की लाये बहार।। पवन अपनी गति दे जाए, पर्वत अडिगता दे जाए। पुष्प अपनी महक दें तुझ को, हरियाली जीवन को हरा बनाये।। धरा दे जाए सहनशक्ति अपनी, गगन दे जाए अपना असीम विस्तार। कोयल अपनी दे जाए कूक तुझे, सागर दे जाए शक्ति अपार। आज बड़ों का आशीर्वाद मिले,  और छोटों का मिले तुझे प्यार। और अधिक नही आता कहना, प्रेम ही हो तेरी सोच का बच्चे आधार।। कतरा कतरा बीत रही जिंदगानी, सबके जीवन की अलग कहानी, अपनी कहानी में मुन्ना, निभाना तूँ बढ़िया किरदार। अनेकानेक विषमताओं और  विविधताओं से भरा हुआ है ये संसार।। जीवन की इस आपाधापी में देख कहीं तूँ खो न जाना, दुनिया की इस भीड़ में अपने लक्ष्य को तूँ पाना।।। इन्ही दुआओं को समझ लेना तूँ अपनी माता का उपहार, जब जब भी पढ़ेगा तूँ लेखनी मेरी,आएगा समझ तुझे जीवन का सार, मैं ही नहीं, प्रकृति भी दे जाए,तुझे तेरे जन्मदिवस पर ढेरों उपहार।।