Skip to main content

Posts

Showing posts with the label लो फिर

लो फिर आया thought by sneh premchand

लो फिर आया वो सात सितंबर,पापा की यादें ले आया,यादों के समंदर में  कोई भवँर लगता है जैसे हो चकराया,मातृ और पितृ ऋण से उऋण कभी भी इंसा नही हो पाता,बरगद सी छाया है गहरी उनकी,सानिध्य से उनके इंसा तृप्त हो जाता।।

छोटी सी

छोटी सी ज़िन्दगी में क्या रूठना क्या मनाना। कैसे गिले, शिकवे और शिकायतें, जब एक दिन जहाँ से खाली हाथचले जाना।