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तप तप

जैसे तप तप सोना कुंदन बन जाता है जैसे उबल उबल चाय में रंग आता है जैसे लम्हा लम्हा कर बच्चा युवा हो जाता है जैसे रोम रोम में नाम राम का जेहन में आता है जैसे बच्चा नींद में भी मां को बुलाता है ऐसे ही जिक्र तेरा यादों का सैलाब ले आता है तूं क्या मायने रखती थी जिंदगी में हमारे, ये अभाव का प्रभाव बताता है।।