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एक एक करके बना काफिला(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

**एक एक करके बना काफिला, कितना प्यारा ये परिवार** *जहां जनकल्याण ने सदा किया है कला,स्वच्छता,सौंदर्य का दीदार* *इस परिवार के मतवाले आ जाते हैं सार्थक करने अपना हर इतवार* *सोच,कर्म,परिणाम को ऐसी बहती है त्रिवेणी,आकंठ डूब जाते हैं हर बार* और अपरिचय क्या दूं उसका???? *है वो सिर्फ और सिर्फ हमारा प्यार हिसार*