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पैबन्द thought by snehpremchand

उम्र की सलवटों पर अनुभवों की कतरन लगा, जब ज़िन्दगी को रफू करने की सोची,तो ज़द्दोज़हद का बड़ा सा पैबन्द नज़र आया।।               स्नेहप्रेमचंद