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Showing posts with the label जन्मदिन मुबारक

मुबारक मुबारक(( दुआ स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

मुबारक मुबारक

पता ही नहीं चला

मुबारक मुबारक

तूं मेरी जिंदगी है

प्रेम सुता

**प्रेम सुता**

मुबारक मुबारक(( दुआ स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

हौले हौले

मुबारक मुबारक (( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

मुबारक मुबारक

कैसा था पापा का ना होना(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

*ऐसा था पापा का न होना* जैसे तन में श्वास का न होना जैसे मन में विश्वाश का न होना जैसे दीपक में तेल का न होना जैसे पेड़ में छांव का न होना जैसे भरे जंगल में राह का हो खोना जैसे मारवाड़ में पानी न होना जैसे जाड़ों में दिनकर का न होना जैसे मां में ममता न होना जैसे तूफान में आशियाना न होना *ऐसा था पापा का न होना* जैसे रिश्तों में प्यार का न होना जैसे दोस्ती में मित्र का हो खोना जैसे पायल में घुंघरू का न होना जैसे गीत में सरगम का न होना जैसे तबले में ताल का हो खोना जैसे धरा में संयम न होना जैसे गगन में विस्तार का हो खोना जैसे अंबर का तारोंविहीन होना जैसे तारों का अपनी चमक खोना *ऐसा था पापा का न होना* जैसे मेहंदी का अपनी लाली खोना जैसे इंद्रधनुष में सात रंगों का ना होना जैसे रंगोली में रंग ही ना होना  जैसे आईने में प्रतिबिंब का हो खोना  जैसे आग में गर्मी का ना होना  जैसे चुंबक में खिंचाव का ना होना जैसे नैनों में ज्योति का ना होना  जैसे पहाड़ में शक्ति ना होना  जैसे मंदिर में मूरत ना होना  जैसे प्रभु में श्रद्धा और विश्वास का ना होना  *ऐसा था पापा का ना होना* जैसे सागर में लहरों

मुबारक मुबारक

मुबारक मुबारक

मुबारक मुबारक

क्या है तेरा होना ((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

[ तेरा होना ] जैसे सावन में बारिश का होना, जैसे गीता में कर्मसंदेश होना, जैसे रामायण में सुशिक्षा होना, जैसे गंगोत्री से गंगा का बहना, जैसे कुसुम में महक का होना, जैसे गन्ने में मिठास का होना, जैसे हलधर की खेती का होना, जैसे साहित्य में कबीर की रचनाएं, जैसे राही के लिए हों राहें, जैसे पार्थ के लिए था अचूक निशाना, जैसे एकलव्य की गुरुनिष्ठा का ताना बाना, जैसे कोयल के लिए कूक का होना, जैसे मन्दिर में घंटी का होना, जैसे रामायण में चौपाइयों का होना, जैसे माधव के लबों पर बांसुरी का होना, जैसे राघव के लिए वचन का पालन करना, जैसे माँ में ममता का होना, जैसे पिता में सुरक्षा भाव का होना, जैसे कूलर में पानी का होना, जैसे नयनों में ज्योति का होना, जैसे चिराग में बाती का होना, जैसे लेखनी में लेखन का होना जैसे दिल मे धड़कन का होना, जैसे चूल्हे में ईंधन का होना, जैसे हल्दी में पीलापन होना, जैसे दिनकर में तेज का हो होना, जैसे इंदु में शीतलता होना, जैसे हीरे में चमक का हो होना, जैसे थकान के बाद निंदिया का होना, जैसे भगति में श्रद्धा का होना, जैसे अपने ईष्ट में विश्वास का होना, जैसे तरुवर पर प

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