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प्रेम के मायने

जो लोग किसी किसी से प्यार करते हैं वे प्रेम का सच्चा अर्थ ताउम्र जान नहीं पाते दरअसल वे प्रेम नहीं मोहपाश से जुड़े होते हैं मोह तालाब सा सीमित परिधि और व्यास वाला होता है जो सबसे प्यार करते हैं उन्हें प्रेम का अर्थ बखूबी समझ आता है वे सागर से गहरे होते हैं जिनकी थाह पाना सरल नहीं गगन सा अनंत विस्तार होता है उनकी सोच का उनकी नजर नहीं नजरिया विहंगम होता है संवेदनशील,सहनशील और अच्छे दिल के होते हैं कभी अपनी परिस्थिति को कोसते नहीं,उन्हें कर्म की कुदाली चला मनःस्थिति के अनुरूप करने की पुरजोर कोशिश करते हैं वे माथा देख कर टीका नहीं निकालते न ही सूरजमुखी के फूल जैसे होते हैं जहां स्वार्थ की धूप खिले वहीं तत्क्षण मुड जाएं वे तो जग रूपी कीचड़ में कमल से खिले रहते हैं हर हालत और हालात में अपनी आत्मा का हुलिया नहीं बदलते अपनी महक से औरों को भी लम्हा लम्हा सुवासित करते रहते हैं श्वास भले ही गिनती के हों उनके पर उनके कर्मों की गूंज युगों युगों के बाद भी कायनात को गुंजित रखती है कोई अतिशयोक्ति न होगी गर इस फेरहिस्त में तेरा नाम सबसे ऊपर रखूं *उम्र छोटी पर कर्म बड़े*