*कितना भी बुला लो चाहे मगर अब माधव नहीं आते हैं* *दुशासन तो हर गली,कूचे,नुक्कड़ पर0 कहीं खड़े मिल जाते हैं* *अब कोई द्रौपदी किसे पुकारे सब गूंगे बहरे से नजर आते हैं* *गुनाहगार को दंडित न किया गया तो फिर प्रश्नचिन्ह लग जाते हैं* *सब सुरक्षित और निर्भय रहें है,यह जिम्मेदारी गण तंत्र दोनों की, क्यों सब भूले जाते हैं ???? *कितना भी बुला लो चाहे मगर अब माधव नहीं आते हैं* *चांद पर पहुंचे भी तो क्या पहुंचे गर धरा पर अपनी ही बहन बेटियों को खतरे में हम पाते हैं* *कलेजे का टुकड़ा होती हैं बेटियां यह क्यों भूले जाते हैं* *अब माधव नहीं आते हैं पर दुशासन तो हर मोड,गली,कूचे पर मिल जाते हैं* *कभी दिल्ली कभी मणिपुर अब दहला हरियाणा* हम भीष्म मौन सा क्यों अपनाते हैं *गलती के लिए सख्त दंड का हो प्रावधान* कहा चाणक्य ने इस बात की गांठ क्यों चित में नहीं लगाते हैं* *कितना भी बुला लो चाहे मगर अब माधव नहीं आते हैं* *दुशासन हर मोड पर कहीं भी मिल जाते हैं* *अब खुद ही बनो कृष्ण तुम सारे* करो हर दुशासन का स्वयं संहार आखिर कब तक होता रहेगा??? चीर हरण,शोषण और बलात्कार *युग बदले पर...