जन्मदिन पर जन्म देने वाली याद आ ही जाती है, अपनी जाने कितनी इच्छाएं दबा कर,हमारी हर खुशी को कर पूरा,मुस्कान हमारे लबों पर लाती है, और कोई नही मेरे दोस्तों,वही तो माँ कहलाती है, हमारी कितनी ही कमियों को कर नज़रंदाज़ हमे अपने चित्त में बसाती है, समय बेशक बीता जाए,पर वो याद आ ही जाती है, और अधिक कुछ नही कहना, बस उसके न होने से सहजता जीवन से दामन चुराती है।। ईश्वर का पर्याय है माँ,अपनी जान पर खेल कर हमें जग में लाती है।। जब सब पीछे हट जाते हैं मां आगे बढ़ कर आती है बच्चे जो गुण दोषों दोनों संग मां अपनाती है मुझे तो लगता है मां बनने के बाद मां मां रूप में ही शेष रह जाती है जो सबसे ज्यादा नजर आनी चाहिए वह मां ही अक्सर नजरअंदाज हो जाती है हर गुस्सा हर आक्रोश निकालते हैं हम मां पर,पर हर हालत में वह पहले जैसी ही हो जाती है कभी कभी तो लगता है मुझे मां क्या जान बुझ कर गूंगी बहरी हो जाती है अपनी प्राथमिकताओं को कभी नहीं रखती प्राथमिक,मुख्य से गौण बन जाती है पर बच्चे ना भूलें अपने कर्तव्य कर्मों को,जाने मां के बाद तो उन्होंने जन्नत की भी ना करी कभी मन्नत, फिर क्यों जिंदगी के एक मोड़ पर मां उपेक्...