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अगर अचानक आ जाते(( भाव स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

अगर अचानक आ जाते तो चमन चित का हो जाता गुलज़ार खून का भले ही ना हो पर कुछ नाते चित में सदा के लिए हो जाते हैं शुमार बड़े स्नेह से स्नेह करती रही आपका इंतजार दिल दरका हौले से मेरा जब पता चला चले गए हों मेरे शहर से, चाह कर भी कर नहीं पाई दरकिनार फिर आओ तो ऐसा ना करना बहनें दुआओं का देती हैं उपहार उनके शहर में आ कर यूं बनता नहीं जाना, जागते रहने दो उनके अधिकार प्रेम सुता हूं जानू प्रेम को चाहिए बस अपनों का प्यार जीवन का परिचय हो रहा था जब अनुभूतियों से तब से आपका अक्स जेहन में है छाया  अतीत के झोले से जब कुछ पल खंगाले,प्रतिबिंब आपका नजर आया रहे सलामत जोड़ी आपकी, मेरे दिल ने गुनगुनाया