Skip to main content

Posts

Showing posts with the label फिर क्या रखा है बाकी संसार में

प्रेम हो जब परिवार में(( विचार स्नेह प्रेम चंद द्वारा))

*प्रेम हो जब परिवार में फिर क्या रखा है बाकी संसार में* *अपने तो अपने होते हैं रहते हैं हर पल सोच विचार में* हर धूप छांव में संग खड़े रहते हैं जानते हैं अंतर जिम्मेदारी और अधिकार में खामोशी की भी जुबान समझ लेते हैं अपने अपनत्व दिखा ही देते हैं हर किरदार में कई बार मुलाकातें नहीं होती जब और हो नहीं पाते संवाद फिर भी छू लेते हैं दिल हमारा, सच्ची खुशी मिलती है अपने ही परिवार में जगह से भले ही दूर हों पर दिल में रहते हैं सदा, आते हैं नजर हर आकृति आकार में प्रेम हो जब परिवार में फिर क्या रखा है बाकी संसार में

प्रेम हो जब परिवार में

प्रेम हो जब परिवार में फिर क्या रखा है बाकी संसार में अपने तो अपने होते हैं रहते हैं सदा ही सोच विचार में खुशी दुनी और गम रह जाता है आधा गर संग खड़ा होता है परिवार