वो गले भले ही ना लगाए बच्चों को, पर दिल में सदा के लिए बसाता है जिंदगी की हर बारिश में पिता हर बार छाता बन जाता है सुरक्षा सहजता स्नेह सम्मान का पिता बच्चों का नाता है मां पर तो बहुत चलती है लेखनी, पर पिता पर आकर लेखक भी ढीला पड़ जाता है।। पर ये क्यों भूल जाते हैं हम??? *मां का रौब और रुतबा पिता से ही मुस्कुराता है* मुझे तो पिता के चेहरे में, ईश्वर का अक्स नजर आता है।। *कभी मीठा कभी खारा है पिता* *डग मगाते कदमों का सहारा है पिता* *धीरज,सुरक्षा,पोषण,पालन, अनुशासन है पिता* *सच में निष्पक्ष सा प्रशासन है पिता* *छोटे से परिंदे का पिता खुला सा आसमान है* *सच में साया है पिता का जिस के सिर पर,वो धनवान है* *राग है अनुराग है पिता* *सच जीवन का मधुर सा साज है पिता* *मां की बिंदी,सिंदूर,सुहाग है पिता* *मां का रुतबा, रौब,अधिकार है पिता* *पिता बिन तो हर बचपन अनाथ है* *पिता बिन हर सांझ सच में बांझ है* पिता कहीं नहीं जाते,जग से जाकर भी जीवित रहते हैं हमारे विचारों में पिता तो पिता ही होते हैं नहीं मिला करते ऐसे नाते बाजारों में।। *पिता है तो मुस्कुराते रहते हैं अधिकार* *पिता है तो जिम...