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Showing posts from 2026

पूर्ण नहीं सम्पूर्ण होती है मां

बहुत मुबारक

*प्रेमपुत्र तूने बड़े प्रेम से  निभाया अपना हर किरदार* *सुख,समृद्धि और सफलता दे दस्तक तेरी जिंदगी के द्वार* *जन्मदिन पर जन्म बच्चे का ही नहीं, एक मा का भी जन्मदिन होता है, जब मां मां बनती है पहली बार* *मां को याद करना है बहुत जरूरी आज,कितने दिल से करती थी मां प्यार* *एक मां की दुनिया में बच्चे ही होते हैं, मां का पूरा संसार* *अपनी जान पर खेल हमें इस जग में लाने वाली मां को नमन और वंदन  बारम्बार* *ऊपर से भी दे रही होगी दुआएं मेरी मां मेरे मां जाए को, कर लेना भाई स्वीकार* *65 बसंत देख लिए तूने जीवन के कोई भी पतझड़ ना छीने तुझ से कोई बहार* *स्नेह ने तो चला दी लेखनी स्नेह भरे दिल से,इसे ही समझ लेना मेरी ओर से सच्चा उपहार* ल

जाने क्यों

सुयोग्य पात्र

कड़वा है मगर है सत्य

शतक लगाना

लम्हे

कोई भी खास दिन और भी खास हो जाता है गर अपनत्व से भरे लोग साथ में हों हमारे सच्चा बैंक बैलेंस होते हैं सच्चे नाते,सच्ची दोस्ती, कहती हूं मैं सांझ सकारे कुछ लोग स्थाई सा निवास बना दिखाई देते हैं चित में, खंगाले जब भी अंतर्मन के गलियारे

महफिल

सजती है महफिल सदा अपनों के संग में होने से स्नेह सम्मान हो एक दूजे के लिए मन में,आते हैं करीब स्नेह की माला में अपनत्व के मोती पिरोने से

कड़वा है

विस्तार

बहुत छोटी है जिंदगी

जन कल्याण

उम्र

निंदा कभी ना कीजिए

मात पिता

मात पिता

शुक्राना बेहतर है

Be grateful, grateful for everything. Be grateful for your little home, even if it is not large. Because it is a refuge where you can rest from the noise of the world. Be grateful for clean clothes, for the food on your table, for the water that quenches your thirst, and for every sunrise that gives you a new opportunity. Be grateful for the things that seem small, because they are often the most important. For being able to breathe without effort, for your hands that work, help, and embrace. For your feet that carry you where you need to go. For your eyes that see the beauty of life, and for your heart that continues to beat. Be grateful for your family, for those who love you, and for those who, in one way or another, have been part of your story. Be grateful for your pet, for that loyal companion who brightens your days without asking for anything in return. Be grateful for nature, for the sky, for the rain, for the sun, and for every detail that reminds us that life is still a mira...

दौर

चित

कोई राग ना हो

छोड़ो दोहन

जवाब

मां से सुंदर कोई अहसास नहीं

देख लो चाहे सारी दुनिया मां से अधिक कोई खास नहीं मानों चाहे या ना मानो मां से प्यारा कोई एहसास नहीं धरा पर ईश्वर का पर्याय है मां जग के इस घने तमस में मां जैसा प्रकाश नहीं 

अपने

लम्हा लम्हा बीती ज़िंदगानी

अपने तो अपने होते हैं जिंदगी के किसी भी मोड पर  मिल लो उनसे, भाव भीने से संग होते हैं ना कोई गिला करते  ना कोई शिकायत भाव वात्सल्य से  प्रेम सूत्र में पिरोते हैं दिल पर दस्तक दे जाते हैं हम भाव विभोर हो जाते हैं जो चले गए उनका मलाल करने से बेहतर है जो हैं उनके हाल पूछते रहें,समझो हम उन अपनों को श्रद्धांजलि दे रहे होते हैं कई बार हम इतने मसरूफ हो जाते हैं गैरों में,अपने मौन से सब कह रहे होते हैं

बनी रहे जोड़ी

मेरी प्यारी बहना अंजु

मेरी प्यारी बहना अंजु… मेरी प्यारी बहना अंजु!  तू थी सबसे न्यारी, भगवान ने बहन बनाकर भेजा,  पर लगी तू सदा ही बेटी प्यारी तेरी सूरत, तेरी बातें,  दिल में घर कर जाती थीं, मेरी बेटी में भी तेरी ही  झलक नज़र मुझे आती थी तू थी जैसे कुदरत का  एक अनमोल सा तोहफ़ा, तेरे बिना ये जीवन लगे अधूरा, जैसे सूना सा कोई रस्ता। हम सबकी वो छोटी गुड़िया,  सबकी बड़ी दुलारी थी, देखते-देखते कब तू दो बेटियों की माँ बन गई,  ये भी एक कहानी थी यूं हीं तो नहीं ये भीड़ तेरी इतनी मां जाई दीवानी थी सुहानी-पावनी में तेरा ही चेहरा मुस्काता है, कुछ भी करूँ उनके लिए, मन तुझ तक ही जाता है। तूने हर रिश्ता ऐसे निभाया, जैसे कोई फर्ज़ नहीं—इबादत हो, बेटी, बहन, माँ, पत्नी… हर रूप में तेरी मोहब्बत हो। नीलेश की दुनिया थी तू, उसकी हर खुशी का राज, तेरे बिना उसका दर्द कह पाना, जैसे टूटे हर एक साज़। हम दुआ करते हैं अब बस, तेरी बेटियाँ मुस्कुराती रहें, अपने पापा के संग जीवन में हर खुशी पाती रहें। मेरी अपनी राहों में भी, तू ही मेरा सहारा थी, हर मुश्किल में लगता था—“अंजु है”, तो उजियारा था। आ...

मैने बोला मुख से राम

यूं हीं नहीं लिखी जाती किताब(( श्रद्धांजलि स्नेह प्रेमचंद द्वारा)

कोई जुगुनू नहीं,कोई दीपक नहीं निश्चित ही वह रही होगी *आफताब* यूं हीं तो नहीं लिखी जाती किताब कुछ नहीं,बहुत कुछ खास था उसमें कभी झूठ का नहीं ओढ़ा *नकाब* कितना भी कठिन हो कोई प्रश्न हौले से दे दिया करती *जवाब* *रौनक ए अंजुमन* का सही होगा उसे देना *खिताब* *चितचोर* कहना भी होगा सही उसे,एक अलग ही था उसका *रुआब* कोई इसके जैसा होगा नहीं कभी कोई दूजा,  पूरा लगा कर देख लिया *हिसाब* *उड़ान गगन सी था धरा सा धीरज* नहीं देखा उसे कभी *बेताब* आज भी सोचती हूं  जब उसके बारे में आंखों में आ जाता है*सैलाब* फूलों में से देना हो कोई नाम तो कहूंगी उसको खिला *गुलाब* छोटे से जीवन में जी गई जीवन बड़ा सा,कभी पसंद नहीं थे उसे शराब,शबाब और कबाब भगति धारा बहती थी चित में बड़े वेग से,ऐसी रही उसके जीवन की *किताब* हमारे परिवार का तो एक हीरा थी *नायाब* एक शब्द में करना हो परिभाषित उसे  होगा वह *लाजवाब* जाने इतना प्रेम कहां से लाई  प्रेम सुता सबसे ही करती थी *बेहिसाब* शीतल इतनी जैसे *माहताब*( चांद) धन्य हो गई मेरी लेखनी जो चली तुझ पर ओ*आफताब* मेरा लिखना सार्थक हो आया हो गई जैसे लेखन में *कामयाब* *हानि ...

कभी नहीं बदली

इजहार

गफलत

उम्र मिलती है

सागर नहीं

सद्गुरु हमारे तारणहार

भगति राह

अति दुर्लभ यह मानव जन्म

नहीं पता क्या नहीं पता

सुख दुख

दरकार

कह गए संत कबीर

खिताब

बेनजीर

जय श्री राम