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Showing posts from 2026

हो उदित भोर फिर आशा की(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

*हो उदित भोर फिर आशा की मिटे नैराश्य का अंधकार* *राम नाम अति मीठा है करके देखो इसे दिल से प्यार* *अंतर्मन के गलियारों में,  जब भी विचरण करने जाओगे राम नाम के हीरे मोती  वहां से निकाल  कर लाओगे* *धर्म,सत्य होते हैं विजयी सदा उच्चारण नहीं आचरण में इसे अपनाओगे* *सही मायने में अर्थ दिवाली का  तभी समझ तुम पाओगे* मन में दीप प्रज्वलित होंगे आशा के संकल्प मिलेगा सिद्धि से हर बार *हो उदित भोर फिर आशा की, मिटे नैराश्य का अंधकार* *सिया लखन संग राम की मूरत  चित में अपने धरनी होगी  हो मन में गर कोई विकार तो, चितभूमि निर्मल करनी होगी* *हुआ बहुत अब करो चित निर्मल सही मायने में होगी जय जयकार* *हो उदित भोर फिर आशा की मिटे नैराश्य का अंधकार* *काम क्रोध मद लोभ मोह सच में लाते हैं अंधकार* *भाई भाई के लिए जहां छोड़ देता है राजपाठ, वहां सच्ची रामायण के होते दीदार* *भाई जहां भाई को सुई की नोक समान नहीं देता भूमि, महाभारत होने को सदा रहेगी तैयार* *अंतर रामायण और महाभारत में आए समझ अब, विवेक सत्कर्मों का करेगा वहां श्रृंगार* *राम को देखो,राम को जानो,राम को समझो कैसे परिस्थिति पर मन...

सुमिरन कर ले राम नाम का(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

*सुमिरन कर ले राम नाम  का जीवन सफल बनाएगा* तेज में होगा*दिनकर*सा तू चमक दमक सा जाएगा सुमिरन कर ले राम नाम का,. चित निर्मल हो जाएगा शीतल होगा तू *चंद्र*सा सब शीतल हो जाएगा मोहक होगा तेरा मुखड़ा *कामदेव*बन जाएगा सुमिरन कर ले राम नाम का जीवन सफल बनाएगा ऐसा परिवर्तन होगा तुझमें तू सोच सोच चकराएगा मन की शुद्धि हो जाएगी मन पावन हो जाएगा हर राह सरल हो जाएगी तेरा मन मंदिर बन जाएगा सुमिरन करले राम नाम का चित निर्मल हो जाएगा सुख भोगेगा इंद्र से बंधु हरिश्चंद्र बन जायेगा आए चाहे जो भी बाधा सत्य पथ अपनाएगा ऐसी कृपा नाम राम की, सारा समझ में आएगा सुमिरन कर ले राम नाम का अंधकार मिट जाएगा मावस बन जाएगी पूनम उजियारा मुस्काएगा मान सम्मान में तू *गणेश* सा, पल भर में बन जाएगा अंतर्मन के गलियारों में, राम नाम सुन पाएगा लागी लागेगी राम नाम की, कुछ और लगा नहीं पाएगा *सुमिरन कर ले राम नाम का जीवन धन्य हो जाएगा लेगा जब भी नाम राम का, चित पावन हो जाएगा धरा पर रह कर सच में तू, अम्बर को छू जाएगा एक भी गुण तू राम जीवन का, सच में तू अपनाएगा क्यों आया था इस चोले में, सत्य यह जान तू पाएगा सुमिरन कर ले नाम राम का, ...

खोजोगे तो मिल जाएंगे रघुपति राघव राजा राम((स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

खोजोगे तो मिल जाएंगे  *रघुपति राघव राजा राम*  रामशरण में आजा पगले, *राम ही तीर्थ राम ही धाम* खोजोगे तो मिल जाएंगे, *रघुपति राघव राजा राम* मन की आँखें खोल जरा तूं, दिख जाएंगे प्यारे राम राम की भगति में कितनी है शक्ति, बतला देंगे तुझे हनुमान खोजो गई तो मिल जाएंगे, *रघुपति राघव राजा राम* श्रद्धा होगी गर शबरी सी, खुद चल कर आएंगे राम झूठे बेरो को बड़े प्रेम से, भोग लगाएंगे श्रीराम जन्म सफल होगा शबरी सा,  हो इस सत्य को,लो तुम जान खोजोगे तो मिल जाएंगे, *कौशल्या नंदन* प्यारे राम *बजरंगी*सी होगी जो भगति,  चित में नजर आएंगे राम सिया सुधि लाए,संजीवनी लाए भाई लखन के बचाए प्राण स्मरण कराई जो शक्ति उनकी *सागर लाँघ गए हनुमान* खोजोगे तो मिल जाएंगे, *रघुपति राघव राजा राम* मर्यादा गर होगी चित में तो,  लंका विजय कर देंगे राम राम ही युक्ति,राम ही मुक्ति *राम के दिल में बसे हनुमान* राम ही दिल है राम ही धड़कन राम करें तेरे पूरण काम खोजोगे तो मिल जाएंगे, *रघुपति राघव राजा राम* भ्रातृ प्रेम हो गर लक्ष्मण सा, सदा संग में रखेंगे तुझे राम भाव रखेगा जो केवट सा  चित में, भव ...

हे राघव फिर से आ जाओ( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

*हे राघव! फिर से आ जाओ आहत है इंसान* *खौफजदा हैं बालक तेरे, कर कृपा तू करुणा निधान* फिर जागा है रावण काम क्रोध का, जीना हुआ है सबका हराम कर दो मर्दन,जग करे क्रंदन, हुआ जैसे युद्ध भीतर कोई घमासान पीड़ा हर ले,निर्भय कर दे कर दे ना तू जग कल्याण खौफजदा है बालक तेरा,  सुन ले ना अब तो भगवान  श्रद्धा नहीं अब चित में शबरी सी, खोज लो चाहे जहान भगति में होती है सच्ची शक्ति, जाने ना इंसा नादान निर्मल चित नहीं कर पाता है, मलिनता का धरता है वह ध्यान भगति नहीं अब बजरंगी सी चित में जन के,भगति भाव बनाता हमें धनवान आए थे सीने में नजर तुम बजरंगी के, बड़े बड़े काज किए भक्तों के बजरंगी ने, ले कर राम तेरा ही नाम त्याग नहीं कोई करे केवट सा, चाहे मुक्ति का फिर क्यों दान??  *चित निर्मल तो कण कण तीर्थ चित निर्मल तो कण कण धाम* छोटी सी बात,पर है गहरी सी, जान ले ना इंसा नादान आए शरण ना कोई विभीषण सा फिर हो कैसे  उसका कल्याण?? बने ना मित्र कोई विभीषण सा जग में, मित्रता का हो कैसे ज्ञान??? नारी अस्मिता के हो संरक्षक, है बड़ा आपसे,आपका नाम फिर से आ जाओ ना राघव कर दो ना अब जग कल्याण आए ...

बसे हो जैसे चित में हनुमन के,मेरे भी राम बस जाओ((स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

*बसे हो जैसे चित में हनुमन के, मेरे भी राम बस जाओ* *नहीं चित,है मेरा निर्मल इसे निर्मल सा कर जाओ* *बसे हो जैसे चित में शबरी के, मेरे भी राम बस जाओ* नहीं श्रद्धा है शबरी सी, मुझे श्रद्धा ये दे जाओ जो साचे प्रेम से शबरी, वे झूठे बेर खिलाती है उन्हें खाते हो तुम दिल से, कि कोयल कूक जाती है ना भूले कोई शबरी को, ये पूरे जग को समझाओ बसे हो जैसे चित में शबरी के, मेरे भी राम बस जाओ बसे हो जैसे चित में लक्ष्मण के, मेरे भी राम बस जाओ नहीं मैं भाई लक्ष्मण सा, मुझे वैसा बना जाओ कि भाई शक्ति भाई की, ये पूरे जग को समझाओ बसे हो जैसे चित में*केवट*के, मेरे भी राम बस जाओ नहीं मैं शुद्ध केवट सा, मुझे भव पार करवाओ बसे हो जैसे चित में*विभीषण*  के, मेरे भी राम बस जाओ नहीं निष्ठा है उस जैसी, मेरे चित में जगा जाओ सहारे शरणागत के हो....२ सहारा मुझे भी दे जाओ बसे हो जैसे चित में*दशरथ* के मेरे भी राम बस जाओ नहीं बेटा मैं तुझ सा.....२ कोई गुण अपना दे जाओ पिता की मान कर आज्ञा, कि वन की ओर जाते हो नहीं कोई लोभ है चित में, जगत को ये बताते हो बसे हो जैसे चित में*सीता*के, मेरे भी राम बस जाओ नहीं मैं सी...

फिर स्मरण करो निज शक्ति का((स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

*फिर स्मरण करो निज शक्ति का* आ जाओ ना बजरंगी फिर एक बार फिर से ला दो कोई संजीवनी बूटी, होश में भी लागे मूर्छित सारा संसार *बल,बुद्धि,विद्या देहु मोहि हरहु क्लेश विकार* कर जोड़ सब कर रहे विनती पवन पुत्र इसे करो स्वीकार फिर स्मरण करो निज शक्ति का आ जाओ ना बजरंगी फिर एक बार* इस जग में हनुमान तो बहुत हैं पर उन हनुमानों को जगाने वाले जामवंत पल पल हो रहे हैं कम, हो ऐसे जामवंतों का जन्म बार बार क्षमताओं का हो पूर्ण रूप से दोहन सत्कर्म बनें मानव जाति का सच्चा अलंकार फिर स्मरण करो निज शक्ति का बजरंगी, आ जाओ ना फिर एक बार  संस्कारों का जिंदगी के भाल पर   टीका नहीं है *सो गए हैं जैसे सारे संस्कार* दो दस्तक उनकी चौखट पर, सोच कर्म परिणाम की त्रिवेणी बहा दो ना फिर इस बार *पूरे जब में उथल पुथल है चहुं ओर है हाहाकार* सच में बजरंगी हो आप ज्ञान गुण सागर, कर दो सबका बेड़ा पार करते हैं जो दिल से मेहनत हों उनके सपने साकार फिर स्मरण करो निज शक्ति का, आ जाओ ना बजरंगी फिर एक बार  मिट जाती हैं पीड़ाएं सारी, नाम आपका लेने से आप सिखाते हो निज चरित्र से सच्ची खुशी मिलती है खुशियां देने से...

करबद्ध हम कर रहे परमपिता से यह अरदास

चित्रकूट की शिला पे बैठे रोते भरत से बोले राम(( स्तुति स्नेह प्रेम चंद द्वारा राघव गाथा अंश))

चित्रकूट की शिला पे बैठे  रोते भरत से बोले राम इतने दुखी तुम  क्यों हो भाई??   कैसे आऊं तेरे काम___२ (कैसे करूं मैं तेरे काम) रुंधे कंठ से बोले भरत फिर *लांछन लाग्यो मुझ पर राम* किया नहीं था पाप जो मैंने भुगत रहा उसके परिणाम*****२ चित्रकूट की शिला पे बैठे रोते भरत से बोले राम देख सकूं न तुझे मैं रोते आऊँ कैसे तेरे काम???? बोले भरत फिर  रूंधे गले से मेरी कहानी सुन लो राम कैसे सुनाऊँ पाती दिल की चैन ना आए सुबह ओ शाम***२ छाया हटी भाई जब से तोरी  लागे मोहे घणा घना घाम   अवध के इस संकट का कारण  मुझे समझते भाई राम कैसे धोऊं इस पाप कलंक को हिवडा मेरा रहा ना जान****२ चित्रकूट की शिला पे बैठे रोते भरत से बोले राम सजल करो न नयन तुम्हारे____२ तुझ में बसते मेरे प्राण हृदय से लगाया भरत को राम ने धीरज देने का  कर गए काम सुनों भरत मेरे प्यारे भाई! देता तुझे हूं सच्चा ज्ञान सहेज के रखना,समेट के रखना जानू मैं,तू नहीं नादान धूल जमे गर दर्पण पर तो निर्मल चित न करे भुगतान  देखे ऊपर ऊपर से जग अंतर्मन की ना पहचान चित्रकूट की शिला पे बैठे रोते भरत से बो...

राम सा पुत्र भला कहां मिलेगा((स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

सत्यनिष्ठ दृढ़ प्रतिज्ञावान श्री राम (( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

धूप धूप सी जिंदगी में छांव छांव से राम(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

मात पिता के अति दुलारे

*मात पिता के अति दुलारे* ऐसे थे श्री रघुराई प्राण जाएं पर वचन ना जाएं राम ने ऐसी रीत निभाई* *श्री राम की मात पिता भगति पूरे जग में आदर्श महान पितृज्ञपालक भी कहा गया है श्री राम को,सबसे सुंदर सपना राम* इसलिए महान नहीं हैं राम कि वे चक्रवर्ती राजा के पुत्र थे, बल्कि इसलिए महान हैं कि उन्होंने बूढ़े घायल वृद्ध जटायु का पुत्रवत अंतिम संस्कार कर,मुखाग्नि देने का किया था काम* *मान आज्ञा पिता की कर धारण वल्कल,वन को कर गए प्रस्थान* *संघर्षों भरा जीवन रहा श्री राम का हर चुनौती को अवसर बनाने का किया काम* *धूप धूप सी जिंदगी में छांव छांव से राम* कर्तव्यपथ पर चलते रहे आजीवन, ज़िम्मेदारियों को निभाते रहे श्री राम *स्नेह से पहले आता सम्मान है, सिखा गए हमें श्री राम मात पिता तो आजीवन रहे राम के लिए देहधारी भगवान* *पुरुषार्थ की,त्याग की,सत्य और नारी अस्मिता की अमिट कहानी है यह राघव गाथा,करती प्रेरणा भोर और शाम* *जब राम जो पता चलता है उन्हें 14 बरस का वनवास मिला है तो देखिए कैसी अद्भुत है उनकी प्रतिक्रिया मा! पिता ने मुझे जंगल का राज्य दे दिया है,बड़ी सफलताएं कर रही हैं मां मेरा वहां इंतजार,ऐसी उनकी सोच...

राम नाम ही चित को भाए

आता है आनंद मुझे श्री राम के वर्णन में((स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

क्या राम कभी बन पाओगे(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

अंगद ने बताया जब रावण को,कौन से 14 लोग मृतक समान हैं

भगत के वश में है भगवान

एक दिन आयेंगे मेरे राम

शबरी चित से राम चेतना तक(( भजन स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

अतिशय प्यारे राम हमारे

यूं हीं तो नहीं इतने महिमामंडित हैं राम((स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

मर्यादा का विश्व विद्यालय है राम परिवार(( स्तुति स्नेह))

सीखना है तो कोई सीखे श्री राम से

पुरुषार्थ की कहानी हैं राम

लहरा गई सरयू नम सी आंखों में

ऐसा प्रेम था राम का भरत भाई से

अंतर रावण और राम में

प्रयास ही बनाते हैं खास

यकीन को भी नहीं होता यकीन

 विश्वाश को नहीं होता विश्वाश कैसी अनोखी सी घड़ी जीवन में आई *आप की वीरता,पराक्रम और साहस ने 174 लोगों की जान बचाई* *घायल होने पर भी की सुरक्षित लैंडिंग, आप को दिल से बहुत बधाई* *आप की वीरता,पराक्रम और साहस ने 174 लोगों की जान बचाई* *घायल होने पर भी की सुरक्षित लैंडिंग, आप को दिल से बहुत बधाई* उड़ते जहाज में हुआ आप पर हमला,खून से लथपथ,फिर भी औरों की जान बचाई देश से दूर हो पर अपनी संस्कृति से नहीं,सबको बात समझ में आई *आपके साहस की बात सुन रामचरित मानस के जटायु का स्मरण हो आया माता सीता के हरण के समय शास्त्रों से सुसज्जित रावण था फिर भी मार्ग रोक माता सीता की रक्षा के लिये वह बिन अपनी जान की परवाह करे आगे आया* *यही धर्म की विराटता है संकट में किसी की रक्षा के लिए आगे बढ़ना* ईश्वर की सच्ची आराधना है* आपके साहस में उसी रक्षक भाव की झलक आती है नजर,  स्वयं घायल होने पर भी प्रतिरोध किया,आपके इस सत्कर्म से दिल में बढ़ जाती है सबके कदर* *आप दिखाते ना सूझ बूझ तो  जाने क्या अनर्थ गगन में हो जाता काँप जाता धरा हिया का, मंजर मरण का नयन भिगो जाता* *चुनौती भरे से कुछ क्षणों म...

कर्म ही परिचय पत्र होते हैं हमारा

*आप की वीरता,पराक्रम और साहस ने 174 लोगों की जान बचाई* *घायल होने पर भी की सुरक्षित लैंडिंग, आप को दिल से बहुत बधाई* उड़ते जहाज में हुआ आप पर हमला,खून से लथपथ,फिर भी औरों की जान बचाई देश से दूर हो पर अपनी संस्कृति से नहीं,सबको बात समझ में आई *आपके साहस की बात सुन रामचरित मानस के जटायु का स्मरण हो आया माता सीता के हरण के समय शास्त्रों से सुसज्जित रावण था फिर भी मार्ग रोक माता सीता की रक्षा के लिये वह बिन अपनी जान की परवाह करे आगे आया* *यही धर्म की विराटता है संकट में किसी की रक्षा के लिए आगे बढ़ना* ईश्वर की सच्ची आराधना है* आपके साहस में उसी रक्षक भाव की झलक आती है नजर,  स्वयं घायल होने पर भी प्रतिरोध किया,आपके इस सत्कर्म से दिल में बढ़ जाती है सबके कदर* *आप दिखाते ना सूझ बूझ तो  जाने क्या अनर्थ गगन में हो जाता काँप जाता धरा हिया का, मंजर मरण का नयन भिगो जाता* *चुनौती भरे से कुछ क्षणों में प्रेजेंस ऑफ माइंड आपने दिखाई 11 स्वर और 33 व्यंजन पड जाते हैं थोड़े,बस धन्यवाद की बजती चित में शहनाई* दुर्गम पथ के ओ बटोही! गीता पढ़ कर नहीं, कर के आपने है दिखाई *भारत रत्न*भी छोटा पड जाता है ...

सबसे सुंदर सपना राम

*जितने भी अपने देखे मनुष्यता ने, सबसे सुंदर सपना राम* भक्तियुक्त,ज्ञानयुक्त और सत्कर्म ही पूजा हैं,बाकी सब विघ्नों का नाम इसलिए नहीं पूजे जाते हैं राम  कि इक्ष्वाकु वंश में जन्म लिया, इसलिए पूजे जाते हैं राम कि अपने कर्मों से अपने जन्म को धन्य किया *शास्त्र पढ़े इसलिए पूज्नीय नहीं हैं राम,जब पड़ी जरूरत शस्त्र उठाने में भी न की देरी,ऐसे हैं राम के जग में काम*   *राम का जीवन है  निरंतर संघर्ष की  अदभुत कहानी पर कभी क्रोध नहीं,कोई गुस्सा कोई घृणा नहीं,भली भांति जानते भी थे मानते भी थे धूप छांव सी होती है ज़िंदगानी* *कभी संतुलन नहीं खोया संघर्ष भरे जीवन में राम ने, जिन मूल्यों और आदर्शों संग जीये,उन्हें कभी नहीं छोड़ा कैसी भी हो भयानक परिस्थिति, पर कर्तव्य कर्मों से कभी मुख ना मोड़ा* *मात्र इसलिए पूजनीय नहीं है श्री राम कि उनका विवाह शिव धनुष की प्रत्यंचा चढ़ा उसे तोड़ने के बाद जानकी जैसी देवी संग हुआ है बल्कि इसलिए पूजनीय हैं राम कि समाज द्वारा ठुकराई गई अहिल्या को भी देवी के संबोधन से संबोधित किया* *राघव गाथा* गा कर सच धन्य हो गया जीवन, पावन हो गई हर सुबह और शाम *जि...

जुग जुग जीयो भारत मां के लाल स्मित माच्छर(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

*आप की वीरता,पराक्रम और साहस ने 174 लोगों की जान बचाई* *घायल होने पर भी की सुरक्षित लैंडिंग, आप को दिल से बहुत बधाई* उड़ते जहाज में हुआ आप पर हमला,खून से लथपथ,फिर भी औरों की जान बचाई देश से दूर हो पर अपनी संस्कृति से नहीं,सबको बात समझ में आई *आपके साहस की बात सुन रामचरित मानस के जटायु का स्मरण हो आया माता सीता के हरण के समय शास्त्रों से सुसज्जित रावण था फिर भी मार्ग रोक माता सीता की रक्षा के लिये वह बिन अपनी जान की परवाह करे आगे आया* *यही धर्म की विराटता है संकट में किसी की रक्षा के लिए आगे बढ़ना* ईश्वर की सच्ची आराधना है* आपके साहस में उसी रक्षक भाव की झलक आती है नजर,  स्वयं घायल होने पर भी प्रतिरोध किया,आपके इस सत्कर्म से दिल में बढ़ जाती है सबके कदर* तन भले ही घायल था आपका पर दिल में थी सच्ची ईमानदारी बखूबी जानते थे आप है आप पर 174 ज़िंदगियाँ बचाने की बड़ी जिम्मेदारी इतनी ऊंचाई पर भी लड़ता रहा विमान के सब यात्री हो सुरक्षित ऐसी जद्दोजहद करता रहा अगणित सलाम ऐसे मां भारती के लाल को,मन पल पल नमन उन्हें मेरा करता रहा *आप दिखाते ना सूझ बूझ तो  जाने क्या अनर्थ ग...

जाने कब आ जाए जीवन की शाम

स्वच्छ भारत अभियान

*स्वच्छ भारत,सुंदर भारत,स्वस्थ भारत ऐसे हो हमारे राष्ट्र की जग में पहचान* *भारत सरकार द्वारा चलाया गया है  स्वच्छता का *स्वच्छ भारत अभियान* *शुरुआत हुई थी इसकी 2 अक्टूबर 2014 को, हो जन जन को उसका समुचित ज्ञान* *इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है स्वच्छता के बारे में जागरूकता बढ़ाना,जो देता दस्तक दिल पर,करता जेहन में बसेरा,छोड़ता चित में पक्के निशान* स्वच्छता मजबूरी नहीं आदत बन जाए हमारी,इस संदर्भ में हमसे बहुत आगे है जापान स्कूल के बाद बच्चे स्वयं करते हैं कक्षा साफ अपनी,  राष्ट्र प्रेम का यह आदत लाती पैग़ाम *स्वच्छ भारत,सुंदर भारत,स्वस्थ भारत ऐसे हो हमारे राष्ट्र की जग में पहचान* *महात्मा गांधी जी* को समर्पित है यह अति खास प्यारा सा खास अभियान जिसके तहत गांव,शहरों,कस्बों,हर गली,कूचों,गलियारों की सफाई पर दिया जाता ज़ोर है,सफाई का करता आह्वान करें संकल्प और करें कर्म  गर प्रतिबद्धता से,  दुर्गम राहें  हो जाएंगी आसान स्वच्छता और स्वास्थ्य का चोली दामन का साथ है,  इस अभियान के मूल में  * जन कल्याण* खुले में शौच की समस्या का उन्मूलन करना मुख्य लक्ष्य है इस अभियान...

समझ लेना राम राज्य आ गया(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा *राघव गाथा अंश*))

आज जन्मदिन है जिनका

आज जन्मदिन है इनका, आए इनके जीवन मे सदा बहार मिले खुशी,सफलता,सुख,समृद्धि  और मिले हम सब का प्यार *रोहिल्लास* और *कुमार्स* की नन्ही कली तुम, तुमसे घर का आँगन गुलज़ार करते थे,करते है,करते रहेंगे  तुम्हे प्यार हम सब बेशुमार कबूल करो आज दुआएँ हमारी, देखो दुआओं से सज रहा संसार मनहर तुम्हारी मोहिनी सूरत, लगते अति सुंदर दीदार करता है मन करें प्रकट, ऊपरवाले का आभार आई जो तुम आँगन में हमारे, समा हो गया है गुलज़ार महकती रहना,चहकती रहना, प्रेम ही हो जीवन का आधार समय तो निश्चित रूप से लेगा  लाडो अँगड़ाई,  पर कभी पनपे न कोमल चित्त में   तेरे कोई भी विकार हमारी जान की जान हो तुम निभाना उत्तम अपना हर किरदार ओ मेरी लाडो बिटिया रानी, खिले ऐसा पौधा मन मे तुम्हारे, जाने जो करुणा,सहयोग, अहिंसा और परोपकार लम्हा लम्हा बीत गए बरस 16 *ब्यूटी विद ब्रेन* तेरे व्यक्तित्व का सार मैं ही नहीं प्रकृति भी दे जाए तुझे तेरे जन्मदिन पर उपहार *धरा* दे जाए धीरज अपना *अम्बर* अन्नत ऊंचाई का गहन विस्तार *पर्वत* दे जाए अडिगता अपनी *पवन *गति से करवाए साक्षात्कार *सागर*दे जाए गह...

राम ही राम पुकारेंगे

कुछ लोग

हो गहन राम की जब अनुभति(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

लहर नाम राम की

बिखरे नहीं निखरे सदा राम(( स्तुति स्नेह प्रेमचन्द द्वारा राघव गाथा अंश))

राम राम जब बोला मुख से(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा से अंश))

अभी थोड़ा तुम रुक जाओ(( रावण का सवाल आम जनता से राघव गाथा अंश))

जब पुतला रावण का बोल उठा(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद राघव गाथा अंश))

सही राह दिखाते हैं श्री राम(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))

इस बार दिवाली पर(( स्तुति स्नेह प्रेमचंद द्वारा राघव गाथा अंश))