Skip to main content

Posts

Showing posts from 2026

PAL

मुबारक मुबारक

*जीवन पथ पर मिले जो हमसफ़र संग उसके जीवन की राहें करना गुलज़ार* *सुख,समृद्धि और सफलता दे दस्तक सदा आपके द्वार* *यूं हीं नहीं ईश्वर हमे जग में एक दूजे से मिलाता है इस जन्म का नहीं होता कोई पिछले जन्मों का नाता है* *सोच कर देखों दुनिया की इस भरी भीड़ में कोई इतना कैसे भाता है आगामी जीवन भी अति विशेष हो बेटा आपका,आज आपके जन्मदिन पर मेरा दिल यही गुनगुनाता है*

गलती

अंतर्मन

एक बार स्नेहांजलि पढ़ लेना

कुछ तो लोग कहेंगे

पढ़ना ही नहीं जीवन में उतार लेना

एक बार स्नेहांजलि पढ़ लेना

कृष्ण कर्ण

सब कहती है स्नेहांजलि

कायनात की रज़ा

एक नायाब सा फूल(( श्रद्धांजलि स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

**उम्र छोटी पर कर्म बड़े** यही परिचय है उनका,क्या क्या करूं उनका गुणगान युग आयेंगे युग जाएंगे व्यक्ति नहीं विचार थे भगत सिंह जोश जज़्बा जुनून उनका रहा परिधान

तिरंगा

गणित कमजोर था मेरी मां का

समझ लेना आजादी आ गई

**आजादी का मतलब मात्र परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त होना ही नहीं है,इसका व्यापक अर्थ देखें तो समझ आता है आजादी का अर्थ है अपने आपको किसी भी चीज़ का गुलाम ना बनने देना,जैसे व्यसनों का,मोबाइल के आवश्यकता से अधिक उपयोग करना** **आजादी का अर्थ है जिम्मेदारी की भावना को थोपा ना जाए बल्कि खुद आगे बढ़ कर जब हम सत्कर्म करें जिससे मात्र अपना ही नहीं परिवार,समाज,देश और विश्व का भला हो,यही आजादी है** **आजादी का एक अर्थ यह भी है जिन लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बिना आजादी की लड़ाई में अपने प्राणों की हंसते हंसते आहुति दी,उनके बलिदान की महत्ता को हम समझें कि यूं हीं नहीं मिली आजादी,जाने कितने वीरों ने भारत मां की रक्षा हेतु अपने प्राण गंवाए हैं,उनके परिवारों के लिए हमारे भीतर एक संवेदना हो,सहयोग करने की प्रवृत्ति हो,यही आजादी है** **आजादी के मायने यह कदापि नहीं होते हम जो जी चाहें करें, जो जी चाहें वही बोलें,जैसा जी चाहें कपड़े पहने,जो भी करें मर्यादा में रह कर और यह सोच कर कि मैं जो भी बोल रहा हूं उसका क्या परिणाम होगा,कहीं मैं मन,वचन वाणी से कोई ऐसा कर्म तो  नहीं कर रहा जो दूजे का मन दुखी हो*...

जन्मदिन मुबारक

दुर्गम पथ के ओ बटोही

पगडंडी से हाई वे तक

सावन आने पर क्यों बुआ का मन बेटी सा हो जाता है

सावन आने पर जाने क्यों बुआ का मन बेटी सा हो जाता है *दिल तो बच्चा है जी* यदा कदा अतीत के गलियारों में जाना उसे भाता है बुआ कभी तो बेटी थी उस आंगन की, भले ही समय संग दौर बदल जाता है आज भी बुआ को अपने भाई भतीजों में मात तात का अक्स नजर आता है स्नेह डोर से जुड़ और भी गहरा हो जाता उसका नाता है वह कुछ लेने नहीं आती पीहर उसका दिल तो अपनों को देख ही खुश हो जाता है सावन आने पर बुआ का दिल सच बेटी सा हो जाता है उस आंगन की माटी की सौंधी सौंधी महक से अंतर्मन उसका पूरे का पूरा  महक जाता है याद आती है उसे अपनी वह गुड़िया अपनी अलमारी अपनी सखी सहेलियाँ,अवरुद्ध सा कंठ रूंधा रुंधा हो जाता है खो जाती है बुआ अतीत के गलियारों में,उसे भतीजी में अपना अक्स नजर आता है याद आते हैं उसे वे मां बाबुल,कतरा आंसू का,कोना आंखों का गीला कर जाता है याद आता है बुआ को वह प्यारा सा बचपन,जहां अधिकार बड़े रौब से मुस्कुराते थे छोटी सी बात पर रूठ जाती थी बुआ, मात पिता उनके कितनी बार मनाते थे जब जब भी आता है सावन, बुआ का दिल बेटी सा हो जाता है आते हैं जब भात कोथली स्नेह परवाह से हाथ मिलाता है कोयल की पीहू पीहू   ए...

ढाल से मात पिता

वह गीता बन कर दिखा गई

मां की पुण्यतिथि पर शत शत नमन

उत्सव नहीं महोत्सव

मां ही कर्म मां ही कर्ता

माँ का होना उतना ही गहरा प्रभाव छोड़ता है, जितना माँ का न होना। जब तक माँ साथ थीं, तब तक उनके होने का अहसास जीवन में उतना ही प्रगाढ़ था, जितना आज उनके न होने का यह अथाह खालीपन है। जीवन का कोई भी सुख हो या कोई भी दुःख, एक शब्द जो अनायास ही मन में उभर आता है, वह है ..माँ”। शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता हो जब उस की याद मेरे साथ न हो। और मुझे विश्वास है कि मेरी अंतिम साँस तक वो मेरे भीतर, मेरी चेतना में, मेरे अस्तित्व में जीवित रहेंगी। आज मुझे लगता है कि मेरा पूरा वजूद मेरी माँ का ही दिया हुआ है। मैं जो भी हूँ, वह केवल और केवल उनके अथक परिश्रम, त्याग, संस्कार और प्रेम का परिणाम है। उसकी तपस्या का ही फल है कि हम सभी भाई-बहन आज एक सम्मानपूर्ण, सुरक्षित और संतुलित जीवन जी रहे हैं। माँ का साहस, उसकी दूरदृष्टि, उसकी  व्यावहारिक बुद्धिमत्ता, उसका  अटूट हौसला और काम करने की उसकी अद्भुत क्षमता वास्तव में बेमिसाल थी। जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी माँ ने कभी हार नहीं मानी। वे स्वयं एक संस्था थीं, एक प्रेरणा थीं। आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करना ऐसा लगता है, मानो सूर्य को दीपक दि...

सावन आने पर क्यों बुआ का दिल बेटी सा हो जाता है(स्नेह प्रेमचंद)

यही दोस्ती है

दोस्ती

दोस्ती

यही दोस्ती है दोस्तों( विचार स्नेह प्रेम चंद))

मुबारक हो बिटिया जन्मदिन तुम्हें

अपनी कहानी खुद कहेगी स्नेहांजलि

दोनों ही कोहिनूर सी

स्नेहांजलि

बरस 20 का भयो री विश्वदीप((मां के दिल की दुआ 31/07/2026))