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कर्मों से ही बनते रावण,कर्मों से ही बनते राम(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

कर्मों से ही बनते रावण कर्मों से ही बनते राम किसको जगाते किसको सुलाते होते सबके अपने अपने काम आज अभी इसी पल से जप लो नाम राम का,जाने कब आ जाए जीवन की शाम सौ बात की एक बात है  राम ही तीर्थ राम ही धाम लंका से मन को अवध बनाने तक क्यों करते हो विश्राम महाभारत से इस चित को रामायण बना दो निष्काम बापू के ये बंदर तीन यही तो हमें सिखाते हैं बुरा न बोलो,बुरा न कहो,बुरा न सुमो पर हम इसे हल्के में ले जाते हैं हल्के में लेना इसको पड जाता है   अक्सर भारी  बहुत सो लिए अब तो जाग लें आई समझने की बारी अच्छी सोच सदा लाती है जीवन में  सु परिणाम कर्मों से ही बनते रावण कर्मों से ही बनते राम