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ढाल से मात पिता

वह गीता बन कर दिखा गई

मां की पुण्यतिथि पर शत शत नमन

उत्सव नहीं महोत्सव

मां ही कर्म मां ही कर्ता

माँ का होना उतना ही गहरा प्रभाव छोड़ता है, जितना माँ का न होना। जब तक माँ साथ थीं, तब तक उनके होने का अहसास जीवन में उतना ही प्रगाढ़ था, जितना आज उनके न होने का यह अथाह खालीपन है। जीवन का कोई भी सुख हो या कोई भी दुःख, एक शब्द जो अनायास ही मन में उभर आता है, वह है ..माँ”। शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता हो जब उस की याद मेरे साथ न हो। और मुझे विश्वास है कि मेरी अंतिम साँस तक वो मेरे भीतर, मेरी चेतना में, मेरे अस्तित्व में जीवित रहेंगी। आज मुझे लगता है कि मेरा पूरा वजूद मेरी माँ का ही दिया हुआ है। मैं जो भी हूँ, वह केवल और केवल उनके अथक परिश्रम, त्याग, संस्कार और प्रेम का परिणाम है। उसकी तपस्या का ही फल है कि हम सभी भाई-बहन आज एक सम्मानपूर्ण, सुरक्षित और संतुलित जीवन जी रहे हैं। माँ का साहस, उसकी दूरदृष्टि, उसकी  व्यावहारिक बुद्धिमत्ता, उसका  अटूट हौसला और काम करने की उसकी अद्भुत क्षमता वास्तव में बेमिसाल थी। जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी माँ ने कभी हार नहीं मानी। वे स्वयं एक संस्था थीं, एक प्रेरणा थीं। आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करना ऐसा लगता है, मानो सूर्य को दीपक दि...

सावन आने पर क्यों बुआ का दिल बेटी सा हो जाता है(स्नेह प्रेमचंद)

यही दोस्ती है

दोस्ती

दोस्ती

यही दोस्ती है दोस्तों( विचार स्नेह प्रेम चंद))

मुबारक हो बिटिया जन्मदिन तुम्हें

अपनी कहानी खुद कहेगी स्नेहांजलि

दोनों ही कोहिनूर सी

स्नेहांजलि

बरस 20 का भयो री विश्वदीप((मां के दिल की दुआ 31/07/2026))

मुबारक हो तुमको जन्मदिन सुहाना

गुरुपूर्णिमा विशेष(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

*किसी भी बात को जो निरस्त नहीं दुरुस्त करे, वही गुरु है* *हमारी खूबियां को पहचाने और हमारी खामियों को दूर करने की कोशिश करे, वही गुरु है* *हमारे भीतर छिपे हनुमान को जो बाहर निकाल कर ले आए यानि हमारी सुप्त शक्तियों को जो जगाने का सामर्थ्य रखता हो,वही गुरु है* *विकारों का शमन करवाए और सद्गुणों का विकास करवाए,वही गुरु है* *अपने ज्ञान,विवेक और मार्ग दर्शन से जो हमारा चहुमुखी विकास करे, वही गुरु है* *अपने ज्ञान का जो सतत अभिवर्धन करे,हर संभावित संभावना को अच्छे से खंगाले, वही गुरु है* *हमारी क्षमताओं का पूर्ण दोहन कर जो हमें धरा से अम्बर की ओर ले जाए,वही गुरु है* *हमारी सफलता पर जो हमसे भी अधिक प्रसन्न हो जाए,हमारी उपलब्धि उसे अपनी उपलब्धि लगे और हमारी असफलता में भी जो हमारे साथ खड़ा हो, वही गुरु है* *जीवन के कुरुक्षेत्र में जो बन सारथी कृष्ण सा हर अर्जुन को कर्म की गीता का संदेश देकर पथ प्रदर्शन करे,वही गुरु है* *कर्म को आनंद बता कर जो परमानंद की अनुभूति करवाए,कठिन राहों को आसान बनाए,हमारे पैशन को प्रोफेशन बनवाने में जो हमारी मदद करे, वही गुरु है* *हमारी रुचियों का संवर्धन और मूल्यों का...

गुरुपूर्णिमा विशेष

अपने ये होते हैं

प्रकृति ने ही करके भेजा है मां का श्रृंगार