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चित निर्मल

परिणय

मधुर नाते

पिता पुत्र

डर के आगे जीत है(( विचार स्नेह प्रेमचन्द द्वारा))

उपहार

हे नीरज

है नीरज रही नीरज से तुम इस जग सिंधु मेr रहा सादा जीवन उच्च विचर  कर्म ही असली परिचय पत्र होतेह एक ही नाम।के व्यक्ति होते हैं हजार स्पष्टवादी,शांत सौम्य स्वभाव आपका चित निर्मल।चितवन भी चारु नहीं पनपा जिया में कोई भी विकार पानी सा पारदर्शी व्यक्तित्व आपका नहीं पनपा चित में कोई भी विकार दिया स्नेह और की परवाह अपने अभिकर्ताओं की,