Skip to main content

हौले हौले बीत गए 60 साल(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

**हौले हौले बीत गए
 जिंदगी के 60 साल**

कुछ खट्टे कुछ मीठे अनुभव
पर मुस्कुराते रहे हर हाल

**आज मेरी दुआएं ही हैं
 सबसे बड़ा उपहार**

**सुख,समृद्धि और सफलता
 दे दस्तक सदा आपके द्वार**

शेष जीवन भी अति विशेष हो आपका,
अच्छे स्वास्थ्य और मानसिक शांति का मिले उपहार

अक्सर कहते हो **चिंता नहीं चिंतन ज़रूरी है** अनुशासन ज़रूरी है**मेहनत ज़रूरी है
सच में बात आपकी बड़ी दमदार

**समय चलता रहा अपनी ही गति से,ओ मेरे पुरसान ए हाल,
आप निभाते रहे बखूबी अपना हर किरदार**
कभी रुके नहीं कभी थके नहीं
आलस्य को किया सदा दरकिनार

**हर चुनौती को अवसर बनाया आपने,
संघर्षों से बिखरे नहीं निखरे हर बार**

**अनेक मार्ग अवरोधक आए जीवन में आपके,
पर अपनी सूझ बूझ,योजनाबद्ध तरीके से पार किया हर बार**

**मात पिता के अच्छे पुत्र बने आप
अच्छे भाई,अच्छेजीवनसाथी,
अच्छे पिता अच्छे अध्यापक अच्छे मित्र का निभाया बखूबी किरदार**

**सादा जीवन उच्च विचार**
अनुशासित जीवन, कर्मों का श्रृंगार

*एक ही व्यक्ति पर खूबियां अनेक*
चित में नहीं पनपा कभी कोई विकार

**ना ढोंग आडंबर ना कोई दिखावा
बाहर भीतर से एक ही किरदार**

**सच्ची प्रीत, स्नेहिल मीत 
सार्थक प्रयासों की चलाई बयार**

**ढूंढने से भी नहीं मिलेगी कोई बुराई
प्रेम ही रहा हर नाते का आधार**

एक बार पूछा किसी ने मुझ से
आप लिखते हो,बेटी आर्ट में महारथ हासिल किए हुए है,बेटा तबला वादक है फिर धवन सर में कौन सा टैलेंट है

मेरा जवाब बड़ा दिल से था
*वे हमें घर में बाहर ऐसा माहौल देते हैं जिससे हम अपने हुनर को
 निखार पाए संवार पाए*
इससे बड़ा और टैलेंट क्या होगा
किसी की छिपी प्रतिभा को पहचान उसे प्रोत्साहन देना


*अजातशत्रु* कहें आपको तो कोई अतिशयोक्ति ना होगी

*निर्मल चित स्वामी*कहें तो भी सही होगा,पल पल व्यक्तित्व में होता रहा निखार

*आधुनिक युग का संत* कहना सही होगा आपको,गृहस्थ में रह कर संतों से रखे आचार विचार

**तप तप जैसे सोना बनता है कुंदन और बन जाता है गले का हार**

**ऐसे ही तो हो आप सबके लिए
रहे सदा ईश्वर के शुक्रगुजार**

**प्रेम से पहले आता सम्मान है
स्नेह स्पेस सम्मान देने के बने सदा हकदार**

*दी सीधे ही दस्तक दिल पर हर बार*
लम्हा लम्हा चलती रही जिंदगी
प्राथमिक रहे चित में सदा ही नेक विचार

बखूबी जानते भी हो मानते भी हो
जिम्मेदारी संग ही मिलते हैं अधिकार

हर जिम्मेदारी बखूबी निभाई आपने
*कुछ किया दरगुज़र कुछ किया दरकिनार*

प्राथमिकताओं में सदा रहा आपके
आपका परिवार
न किसी की की कभी बुराई
निर्मल चित,चितवन भी चारु,चित चरित्र चेतन अचेतन में सद व्यवहार

सादगी की नाव,संयम की पतवार
ऐसा मांझी बना खेवैया,हो गई मैं तो भव से पार

*डिप्लोमेसी* कभी आई नहीं
सरलता को समझा सदा जीवन का सार

कम बोला पर जो भी बोला सोच कर बोला,मधुर वाणी उम्दा व्यवहार

सोच कर्म परिणाम की त्रिवेणी बहाई हर बार
*बड़े सपने देखो लक्ष्य साधो अनुशासन और प्रतिबद्धता से लाओ निखार*

*मेहनत का कोई शॉर्ट कट नहीं होता*
बतलाया अपने ही उदाहरण से,
कुछ कर गुजरने का जज्बा रहा चित में शुमार

*लगे रहो,अडे रहो,डटे रहो*
इसका सदा किया अनुसरण, 
दिल से उसे किया स्वीकार

*सनक लगन अगन पागलपन*
जिसने समझा उसी ने किया,
मिल जाते उसे सारे अधिकार

Hard work beats talent when talent does not work
प्रयास ही तो होते हैं जो बना देते हैं हमें खास
सदा सिखाया आपने सबको,
कितना अदभुत सुखद विलक्षण आभास

Harder u work,luck u get
मेहनत बदल सकती है भाग्य
मेहनत एक ना एक दिन रंग लाती है
स्टूडेंट्स को भी यही सिखाया आपने
आपके जीवन की कहानी भी यही सिखाती है

गुरु हो गर राम कृष्ण परम हंस सा,शिष्य विवेकानंद बन जाता है
गुरु ही गर चाणक्य जैसा
शिष्य चंद्रगुप्त मौर्य बन जाता है
गुरु हो गर आपसा
मां जाई के चित में UPSC क्रैक करने की लौ जलाता है
शिष्य के भीतर छिपे हनुमान को राम ही बाहर निकाल कर लाता है
सच में यह किरदार निभाना आपको बखूबी आता है


**जिंदगी की एक ही सच्ची कहानी है
सफलता सिर्फ मेहनत की दीवानी है**

ये सब कुछ लिख कर रखा है अपने श्याम पट्ट पर,जो जिंदगी को उजला किए जाती है








Comments

  1. अद्भुत मेरे पास शब्द नहीं है कि मैं आपकी इस सच को सच अनुभूति प्रदान करने वाली कला के बारे में कुछ लिख सकूं बस एक लाइन जरूर कहूंगी हो आप दोनों ही हो
    बहुत कमाल
    आपकी छाया में हर व्यक्ति रखता कर्म बेमिसाल व्यक्ति को इंसान और छात्र को इंसान बना ही देता आपका मार्गदर्शन भले कुछ भी हो हाल


    आप जियो हजारों साल...
    बीते शेष जीवन भी बेमिसाल....
    रहे आपकी सेहत हमेशा कमाल...
    हमेशा खुश रहो मुस्कुराते रहो जीवन में हर हाल

    Happiest birthday Sir...🎉


    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

वही मित्र है((विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

कह सकें हम जिनसे बातें दिल की, वही मित्र है। जो हमारे गुण और अवगुण दोनों से ही परिचित होते हैं, वही मित्र हैं। जहां औपचारिकता की कोई जरूरत नहीं होती,वहां मित्र हैं।। जाति, धर्म, रंगभेद, प्रांत, शहर,देश,आयु,हर सरहद से जो पार खड़े हैं वही मित्र हैं।। *कुछ कर दरगुजर कुछ कर दरकिनार* यही होता है सच्ची मित्रता का आधार।। मान है मित्रता,और है मनुहार। स्नेह है मित्रता,और है सच्चा दुलार। नाता नहीं बेशक ये खून का, पर है मित्रता अपनेपन का सार।। छोटी छोटी बातों का मित्र कभी बुरा नहीं मानते। क्योंकि कैसा है मित्र उनका, ये बखूबी हैं जानते।। मित्रता जरूरी नहीं एक जैसे व्यक्तित्व के लोगों में ही हो, कान्हा और सुदामा की मित्रता इसका सटीक उदाहरण है। राम और सुग्रीव की मित्रता भी विचारणीय है।। हर भाव जिससे हम साझा कर सकें और मन यह ना सोचें कि यह बताने से मित्र क्या सोचेगा?? वही मित्र है।। बाज़ औकात, मित्र हमारे भविष्य के बारे में भी हम से बेहतर जान लेते हैं। सबसे पहली मित्र,सबसे प्यारी मित्र मां होती है,किसी भी सच्चे और गहरे नाते की पहली शर्त मित्र होना है।। मित्र मजाक ज़रूर करते हैं,परंतु कटाक...

बुआ भतीजी

सकल पदार्थ हैं जग माहि, करमहीन नर पावत माहि।।,(thought by Sneh premchand)

सकल पदारथ हैं जग मांहि,कर्महीन नर पावत नाहि।। स--ब कुछ है इस जग में,कर्मों के चश्मे से कर लो दीदार। क--ल कभी नही आता जीवन में, आज अभी से कर्म करना करो स्वीकार। ल--गता सबको अच्छा इस जग में करना आराम है। प--र क्या मिलता है कर्महीनता से,अकर्मण्यता एक झूठा विश्राम है। दा--ता देना हमको ऐसी शक्ति, र--म जाए कर्म नस नस मे हमारी,हों हमको हिम्मत के दीदार। थ-कें न कभी,रुके न कभी,हो दाता के शुक्रगुजार। हैं--बुलंद हौंसले,फिर क्या डरना किसी भी आंधी से, ज--नम नही होता ज़िन्दगी में बार बार। ग--रिमा बनी रहती है कर्मठ लोगों की, मा--नासिक बल कर देता है उद्धार। हि--माल्य सी ताकत होती है कर्मठ लोगों में, क--भी हार के नहीं होते हैं दीदार। र--ब भी देता है साथ सदा उन लोगों का, म--रुधर में शीतल जल की आ जाती है फुहार। ही--न भावना नही रहती कर्मठ लोगों में, न--हीं असफलता के उन्हें होते दीदार। न--र,नारी लगते हैं सुंदर श्रम की चादर ओढ़े, र--हमत खुदा की सदैव उनको मिलती है उनको उपहार। पा--लेता है मंज़िल कर्म का राही, व--श में हो जाता है उसके संसार। त--प,तप सोना बनता है ज्यूँ कुंदन, ना--द कर्म के से गुंजित होता है मधुर व...