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निरस्त नहीं दुरुस्त

कभी रुकी नहीं कभी थकी नहीं

अतीत और वर्तमान

कभी रुकी नहीं कभी थकी नहीं(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

निरस्त नहीं दुरुस्त(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा)

मधुर आगमन(( मनोभाव स्नेह प्रेमचंद द्वारा)

चंद लम्हों में कैसे कह दूं(( विचार स्नेह प्रेमचन्द द्वारा)