हर रंग कुछ नहीं
बहुत कुछ कहता है
हर रंग के कुछ विशेष ही
होते हैं जज़्बात
नीले पीले हरे गुलाबी नारंगी
अनेक भावों की ले कर आया सौगात
होली पर्व के मायने सही रूप से सार्थक सिद्ध हो जाएंगे
समझ लेंगे गर हम हर रंग की परिभाषा
हर रंग कहता है
हो जीवन में खुशियां
न हो ईर्ष्या द्वेष अवसाद विषाद दुख और निराशा
कर्म करने से पीछे हटे ना कभी
कर्म करने की चित में रहे सदा जिज्ञासा
कोई जाति नहीं कोई धर्म नहीं
कोई रंग नहीं कोई क्षेत्र नहीं
कोई भी दीवार आड़े ना आए मानवता की राह में,
विश्व बंधुत्व के भाव की हो अभिलाषा
होली पर्व है उल्लास का
आस का विश्वास का
उमंग का तरंग का
एकता का
सामाजिक समरसता का
मन के विज्ञान का
यही तो हर रंग कहता है
Comments
Post a Comment