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Showing posts from September, 2025

बेजुबान दिल के मासूम

Mother# life line# great mother

कुछ लोग

कभी कभी नहीं अक्सर

Best poem on sister Anju Kumar

मैने पूछा मासूमियत से

Zubeen Da # legend # Great singer(( THOUGHT BY SNEH PREMCHAND))

दिल पर दस्तक,जेहन में बसेरा चित में करते थे वास अभाव का प्रभाव बताता है कोई जीवन में कितना होता है खास जिंदगी के रंगमंच से अचानक यूं चले जाना,अपूरणीय क्षति अति दुखद आभास सदा के लिए तो रहने नहीं आया कोई इस जग में पर आप का जाना जैसे तन से निकल गई हो श्वास हे ईश्वर!  शांति देना दिव्य दिवंगत आत्मा को आज यही आप से है अरदास पूर्वोत्तर का लाल तूं बड़ा कमाल तूं तेरे अभाव का प्रभाव बता गया तूं कितना खास क्या प्रसिद्ध है आसाम का पूछा किसी ने जुबिन दा से तो मिला जवाब राइनो,चाय और जुबिन उनकी विदाई ने यही लगाया हिसाब अपने कर्मों की स्याही से लिखी जुबिन ने अपनी किताब जिंदगी लंबी भले ही ना हो पर बड़ी हो, सिद्ध कर गए कोहिनूर नायाब

Zubeen Garg# Indian singer& composer(( thought by Sneh Premchand))

SINGER ZUBEEN DA

UNITY IN DIVERSITY(( thought by sneh premchand)

एक ही वृक्ष के हैं हम फल,फूल,पत्ते,कलियाँ,अंकुर और हरी भरी शाखाएँ,विवधता है बेशक बाहरी स्वरूपों में हमारे,पर मन की एकता की मिलती हैं राहें, हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई, हैं सब आपस में भाई  भाई,एक खून है,एक ही तन है,इंसा ने ही है ये जात पात बनाई,वसुधैव कुटुम्बकम की भावना काश की हमने होती अपनाई, फिर ना बनाता जश्न कोई किसी की मौत का,न हमने सरहद समझी होती परायी,जीयो और जीने दो के सिद्धांत की,क्यों नही हमने घर घर अलख जलाई,आतंकवाद का हो जाये  खात्मा,ईद दिवाली हो सब ने संग मनाई,सुसंस्कारों की घुट्टी पीले अब हर इंसा, बदल दे अपनी सोच की राहें, धरा बन जायेगी स्वर्ग फिर बंध,ूअपने लाल को खो कर किसी माँ की नही निकलेंगी आहें,एक ही वृक्ष के हैं हम फल,फूल,पत्ते और हरी भरी शाखाएँ

SINGER Zubeen Garg# Zubeen Da# AssamMusic कल्चरल icon(( homage by Sneh Premchand))

Jubin Cultural Icon was not only a singer he was great human being,a legend & legend never dies They stay in people's heart for ever a singer,musician,actor & public voice  38000 songs,40 languages but he remained connected to his roots like a real hero

Zubeen Garg# Aasam Singer# musician लम्हे की खता बनी बरसों की सजा(( thought by Sneh Premchand))

शब्द मौन हैं भाव स्तब्ध हैं  कोई बहुत ही खास हौले से निकल गया जिंदगी के रंगमंच से, फिजा भी है आज उदास उदास

Zubeen Garg# Aasam Singer जुबिन मात्र एक नाम नहीं(( thought by Sneh Premchand))

आज जन्मदिन है इनका

सच में मां जैसा कोई और नहीं

चलो ना मन(( भगति भाव स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

बांसुरी बजाने वाले हाथ वक्त पड़ने पर सुदर्शन भी चला लें,वे कृष्ण हैं अपनी परिस्थिति और अपने परिवेश को कभी ना कोसने वाले,कर्मों से भाग्य बदलने वाले कृष्ण हैं सर्व सामर्थ्यवान होते हुए भी जो महाभारत युद्ध में अर्जुन के सारथि बन पांडवों का मार्ग दर्शन करते हैं, वे कृष्ण हैं युद्ध रोकने की हर संभव कोशिश करते हुए जो शांति दूत बन मात्र 5 गांवों की पांडवों के लिए दुर्योधन से गुजारिश करते हैं,वे कृष्ण हैं मात पिता छूटे,बाल सखा छूटे,राधा छूटी,जन्मस्थान छूटा,क्या क्या नहीं छोड़ना पड़ा कृष्ण को पर कभी कर्तव्य और विवेक का दामन नहीं छोड़ा और ना ही कर्ण की भांति कभी हालत और हालातों को कोसा,निज प्रयासों से बेहतरीन करने की आजीवन कोशिश की, वे कृष्ण हैं प्रेम पाने का ही नाम नहीं है अपने और राधा के उदाहरण से प्रेम की नई परिभाषा लिखने वाले कृष्ण हैं प्रेम का इससे सुंदर कोई उदाहरण नहीं, अक्स देखती है राधा दर्पण में अपना और उसे अक्स कान्हा का नजर आता है राधा की श्वास, मीरा की भगति और रुक्मिणी का सिंदूर हैं कृष्ण देवकी का अंश,यशोदा की धड़कन हैं कृष्ण सुदामा संग मित्रता निभा कर मित्रता के सच्चे पर...

चंद लफ्जों में कैसे कह दूं(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

चंद लफ्जों में कैसे कह दूं????? हिंदी तेरी अदभुत,अनोखी,गजब दास्तान दिल पर दस्तक,जेहन में बसेरा, चित में तेरे पक्के निशान साहित्य का आदित्य है तूं, आर्यावर्त का तूं अभिमान और परिचय क्या दूं तेरा???? तूं हीं राष्ट्र का गौरवगान  एकता सूत्र ने बांधे है तूं जनकल्याण का करे आह्वान भारत के माथे की बिंदी गहरी सागर सी,भावप्रधान तेरे अस्तित्व से तो हिंदी दमक रहा है हिंदुस्तान चंद लफ्जों में कैसे कह दूं??? हिंदी तेरी अदभुत,अनोखी,गजब दास्तान साहित्य का आदित्य है तूं आर्यावर्त का है अभिमान तुलसी की रामायण हिंदी हिंदी ही गीता का ज्ञान बच्चन की मधुशाला हिंदी हिंदी राष्ट्र का गौरव गान मातृ भाषा न रह जाए कहीं मात्र भाषा रखना होगा सबको इस बात का ध्यान जिस भाषा में आते हैं विचार चित में, उसी में भावों को पहनाएं परिधान ओ हिंदी! जो मुख मोड रहे हैं तुझ से सन्मति करना उन्हें प्रदान चंद लफ्जों में कैसे कह दूं ??? हिंदी तेरी अदभुत अनोखी गजब दास्तान तेरा परिष्कृत और प्रांजल रूप आए सबके सामने सच में भाषा तूं बड़ी महान हिंदी तेरी महक से ही महक रहा पूरा हिंदुस्तान 61 करोड़ से भी अधिक लोगों द्वारा बोली गई भाषा ...

मां पर अभाव का प्रभाव ना था(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

मां पर किसी अभाव का प्रभाव नहीं था जो बहुत बड़ी बात है जो था जैसा था उसमें अपना बेस्ट करना उनकी फितरत में था घर आए लोगों को देख कभी उनकी पेशानी पर परेशानी की सिलवटें नहीं देखी सच में मां का याद करो तो एक बात जेहन में आती है *वो इतना सब कुछ कैसे कर लेती थी* ईंटों के फर्श को रगड़ रगड़ लाल निकालना, सारा समान बाहर निकाल अच्छे से सफाई करना और तो और भैंसों की भी रंगीन कटिंग्स ला कर गल पट्टी बनाना  कभी अपने परिवेश और परस्थिति को ना कोसना बस इसी लगन में रहना बच्चों को शिक्षित करना, कर्म का अनहद नाद  बजाना,हर संभावित सम्भावना को खंगालना,सुधार लाना और निखार  लाना   ग्रेट मां हम सारे मिल कर भी उतना नहीं कर सकते जो मां ने बिन किसी खास सुविधा और संसाधनों में कर दिखाया मां में जिजीविषा उल्लास था पर्वों के प्रति श्रद्धा थी सेलिब्रेट करना आता था मां को,मां में सबको अपना बनाने की कला थी वहीं चीज आगे जा कर अंजु में स्थानांतरित हो गई मां से बड़ी संस्कारों की पाठशाला कोई हो नहीं सकती जैसे जैसे ये दिवाली के आस पास के दिन आते हैं वो याद आ जाती है याद आ जाता है मां का हर फंक्शन के पहले...

आओ मां का करें स्वागत

श्राद्ध होता है श्रद्धा से(( श्रद्धांजलि स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

दोस्ती की परिभाषा

समझ लेना धरा पर जन्नत आ गई

मित्रता का आधार है प्रेम

मित्र के इत्र से

लहजे बता देते हैं

स्नेह सम्मान

मात्र खून का नहीं

स्नेह,परवाह,सम्मान,अपनत्व

poem on Hindi diwas#कहां नहीं है हिंदी# जन जन की भाषा(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

poem on Hindi diwas#दिल और आत्मा की भाषा है हिंदी# हिंदी दिवस (( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

जैसा उच्चारण होता है हिंदी में वैसा ही आचरण उसका होता है अंग्रेजी में तो साइलेंट हो जाते हैं अक्षर पर हिंदी में तो बिंदी भी लगती है बोलने,ऐसा प्रभाव हिंदी का होता है