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Showing posts from April, 2026

रिजेक्ट नहीं करेक्ट

रौनक ए अंजुमन

क्षणभंगुर

राम नाम की स्तुति

हर लम्हे को ऐसे जीयो

मां की वह तस्वीर

कॉर्निस पर सजी माँ की वह तस्वीर, जिसमें उनकी गोद में एक नन्ही सी दुनिया मुस्कुरा रही है  वह नन्ही बच्ची मैं ही थी जो वात्सल्य सुख पा रही है माँ की बाँहों का वह घेरा, मानो पूरी सृष्टि का सबसे सुरक्षित आसरा हो, जहाँ डर का नाम नहीं, बस स्नेह की गरमाहट थी सहजता थी सुरक्षा और अपनत्व था हम सब भाई-बहनों के  बचपन की वह तस्वीर आज भी दीवार पर नहीं,  दिल में टंगी है  अमिट, अनमोल, और सदैव जीवंत सदाबहार पुष्प के मानिंद समय बदल गया, हम बड़े हो गए, पर उस एक पल में माँ का प्यार आज भी वैसा ही ठहरा हुआ है  जब जब अतीत के झोले में झांकती हूं और खोलती हूं खिड़कियां तो  बचपन किवाड़ खोलने ऐसे आ जाता है जैसे किसी खिड़की से नृत्य करते धूलि कण एक ही कतार में ढलते दिनकर की चमक में नजर आते हैं अस्थाई से इस जीवन में मां स्थाई रूप से नजर आती है आज भी

मां जब तक है इस संसार में

रघुपति राघव राजा राम

प्रेमसुता

अनहद नाद

जलजात

अंत नहीं विराम

जलजात सी

कुछ लोग

मुबारक मुबारक

अंत नहीं विराम

भाई दूज

शुक्रिया

बता ना पार्थ

लाजवाब

बसेरा

धरा गगन

सम्मान

कुछ भी तो नहीं आसान पढ़ाई से

आफताब

छूना आता था आकाश

जब उसने कहा कुछ लिख दो ना

किताब नहीं जर्नी

सावन में मल्हार सी

नहीं हो सकता

यह किताब मात्र एक किताब नहीं एक ऐसी जर्नी है एक ऐसा सफर है जिसके लिए शब्दावली संभव नहीं यह किताब एक ऐसा *दर्पण* है जिसमें मां जाई का वास्तविक अक्स नजर आता है यह किताब एक ऐसा *भाव सागर* है  जिसका हर हर्फ भावों में गोता खा कर ही पन्नों की स्याही में तब्दील हुआ है यह किताब उन अनुभूतियों की अभिव्यक्ति है जो सच लिखने के लिए बरसों से बेताब थी यह किताब स्नेह ने स्नेह रंगों से स्नेहिल भाव चित में लेकर उकेरी है उस रंगरेज के बारे में बताती है यह जो  आकंठ प्रेम रंग में रंगी हुई थी और जिसने प्रेम चित्र हर दिशा और हर दशा में बनाए यह किताब उस कर्मठता,साहस,जोश,जज्बे और जुनून की कहानी है जिससे मां जाई का चित आजीवन सजा रहा यह किताब बताती है बड़े सपने देखो अपने पंखों को उड़ान दो फाश से अर्श तक पहुंचा जा सकता है इस बात पर भी प्रकाश डालती है यह किताब कि *कर्म बदल सकते हैं भाग्य* परिवेश और परवरिश को ना कोस अपनी हिम्मत से व्यक्ति आसमान की बुलंदियों को छू सकता है यह किताब बताती है एक ही व्यक्ति m ज्ञान,मधुर बोली और मधुर व्यवहार तीनों का संगम हो सकता है जैसे मां जाई रही

पहली बारिश

महक

भाव

बेहिसाब

अंतराल