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Showing posts from April, 2026

किताब नहीं जर्नी

सावन में मल्हार सी

नहीं हो सकता

यह किताब मात्र एक किताब नहीं एक ऐसी जर्नी है एक ऐसा सफर है जिसके लिए शब्दावली संभव नहीं यह किताब एक ऐसा *दर्पण* है जिसमें मां जाई का वास्तविक अक्स नजर आता है यह किताब एक ऐसा *भाव सागर* है  जिसका हर हर्फ भावों में गोता खा कर ही पन्नों की स्याही में तब्दील हुआ है यह किताब उन अनुभूतियों की अभिव्यक्ति है जो सच लिखने के लिए बरसों से बेताब थी यह किताब स्नेह ने स्नेह रंगों से स्नेहिल भाव चित में लेकर उकेरी है उस रंगरेज के बारे में बताती है यह जो  आकंठ प्रेम रंग में रंगी हुई थी और जिसने प्रेम चित्र हर दिशा और हर दशा में बनाए यह किताब उस कर्मठता,साहस,जोश,जज्बे और जुनून की कहानी है जिससे मां जाई का चित आजीवन सजा रहा यह किताब बताती है बड़े सपने देखो अपने पंखों को उड़ान दो फाश से अर्श तक पहुंचा जा सकता है इस बात पर भी प्रकाश डालती है यह किताब कि *कर्म बदल सकते हैं भाग्य* परिवेश और परवरिश को ना कोस अपनी हिम्मत से व्यक्ति आसमान की बुलंदियों को छू सकता है यह किताब बताती है एक ही व्यक्ति m ज्ञान,मधुर बोली और मधुर व्यवहार तीनों का संगम हो सकता है जैसे मां जाई रही

पहली बारिश

महक

भाव

बेहिसाब

अंतराल

गुणगान

नजदीक के चश्मे से जब देखा उसे

यादें

आभास

दिल का नाता रहा तुझ से

prayer meet

धरोहर

कई बार

बहस का अंत जीत नहीं थकान होती है

हर बहस का अंत जीत नहीं,  सिर्फ थकान होती है पहले हर बात पर जवाब देना ज़रूरी लगता था, अपनी बात साबित करने की एक आग थी भीतर… लेकिन अब वो आग ठंडी हो गई है, और उसकी जगह एक सुकून ने ले ली है अब चुप रह जाना आसान लगता है, क्योंकि हर इंसान अपने ही सच में जी रहा है और किसी का सच बदलने की कोशिश, दरअसल खुद को ही थकाने जैसा है धीरे-धीरे ये एहसास गहरा हो जाता है हर लड़ाई लड़ना जरूरी नहीं होता कुछ लोग समझने के लिए नहीं, सिर्फ बोलने के लिए होते हैं हर बार समझाने की कोशिश में हम खुद ही उलझते चले जाते हैं… इसलिए अब न बहस न सफाई  बस थोड़ा दूर हो जाते हैं क्योंकि कुछ रिश्ते जीतकर नहीं, छोड़कर ही बचते हैं और कुछ सुकून ऐसे होते हैं जो जवाब देने में नहीं, चुप रह जाने में मिलते हैं अब हम साबित करने नहीं, संभालने लगे हैं खुद को, अपनी शांति को शायद यही समझदारी है कि हर आवाज़ का जवाब आवाज़ नहीं होता, और हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं होता कुछ बातें हवा में छोड़ देना ही बेहतर है… ताकि हम खुद के भीतर थोड़ा कम टूटें, और थोड़ा ज्यादा बचें… अपनों से जीत कर भी हम हार ही जाते हैं मैं सही तूं गलत करते ...

परिस्थिति और मनःस्थिति

भरोसा ही परोसा है

भरोसा ही परोसा है निगम ने सदा

मां रूप में

अद्भुत

बाबा साहेब

क्या है यह किताब

Anju always in my memory

आशा भोंसले(( विनम्र श्रद्धांजलि))

चली गई सुरों की मल्लिका संगीत जगत को कर के सूना नस नस में जिनके था गायन उनके जाने से दुख हुआ है दूना

मुबारक

आज पापा होते तो

मेरी प्यारी अंजु बुआ

ANJU BUA RARE IN CHARACTER

सिर्फ नाम नहीं सुकून भरी पहचान