Skip to main content

Posts

Showing posts with the label आज भी जेहन में है

मां की वह तस्वीर

कॉर्निस पर सजी माँ की वो तस्वीर, जिसमें उनकी गोद में एक नन्ही सी दुनिया मुस्कुरा रही है  वह नन्ही बच्ची मैं ही थी। माँ की बाँहों का वह घेरा, मानो पूरी सृष्टि का सबसे सुरक्षित आसरा हो, जहाँ डर का नाम नहीं, बस स्नेह की गरमाहट थी सहजता थी सुरक्षा और अपनत्व था हम सब भाई-बहनों के  बचपन की वह तस्वीर आज भी दीवार पर नहीं,  दिल में टंगी है  अमिट, अनमोल, और सदैव जीवंत सदाबहार पुष्प के मानिंद समय बदल गया, हम बड़े हो गए, पर उस एक पल में माँ का प्यार आज भी वैसा ही ठहरा हुआ है  जब जब अतीत के झोले में झांकती हूं और खोलती हूं खिड़कियां तो  बचपन किवाड़ खोलने ऐसे आ जाता है जैसे किसी खिड़की से नृत्य करते धूलि कण एक ही कतार में ढलते दिनकर की चमक में नजर आते हैं अस्थाई से इस जीवन में मां स्थाई रूप से नजर आती है आज भी