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एक सवाल

वर्किंग है क्या तुम्हारी मां

चयन

जीवन का हर पल अपने भीतर कोई न कोई सीख छुपाए होता है। हम केवल मंजिल पर ध्यान देते हैं,जबकि असली ज्ञान उन रास्तों में मिलता है जिनसे हम गुजरते हैं।  सफर सुहाना हो तो मंजिल सुकून ही देती है सच में जिंदगी सफर ही तो है एक ऐसा सफर जो सब कर तो रहे हैं पर जानते बहुत कम लोग हैं कि यह सफर कैसा है इसलिए जीवन में वही राह चुननी चाहिए जो केवल बाहरी success न दे बल्कि भीतर उम्मीद भी जगाए और मन को शांति भी दे।ऐसी राह जहाँ डर कम और विश्वास अधिक हो जहाँ comparison नहीं, self-satisfaction हो, जहां कोई राग द्वेष ईर्ष्या अहंकार न हो कर मन में स्नेह धारा बहे क्यों कि अंत में इंसान को सबसे अधिक सुकून उसी जीवन से मिलता है जिसमें उसके निर्णयों ने उसके मन को अंधेरे नहीं बल्कि प्रकाश की ओर उन्मुख किया हो, एक बार श्री कृष्ण से कहा किसी ने आप तो भगवान हो आपने महाभारत का युद्ध कैसे होने दिया श्री कृष्ण का बहुत सुंदर सारगर्भित जवाब यह दुर्योधन का चयन था जो उसे विनाश की ओर ले गया,मैं तो शांति दूत बन शांति प्रस्ताव ले कर गया था जिसमें मात्र पांच गांव मांगे थे पर उसका जवाब था सुई की नोक के बराबर भी भूमि...

भावों से होता है अनमोल उपहार

मां कंठ हम आवाज

मां से बेहतर मां से मीठा होता ही नहीं कोई साज़ यूं हीं तो नहीं कहा गया मां कंठ हम आवाज

पूरा जहां

ओ नर्मदा

ओ नर्मदा क्यों बनी नहीं नर्म तूं क्यों इतने जीवन लील लिए क्रूज बना क्यों इतना क्रूर क्यों घाव सदा के लिए दिए