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मुझे नहीं पता

मुझे ये तो नहीं पता कहाँ पर क्या,कैसे,कब,क्यों
छपवाना है,हाँ दिल पर जो छप जाता है उन भावों को शब्दों की मदद से आता मुझे निकलवाना है।।
          स्नेहप्रेमचंद

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