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Wotld poetry day ह्रदय मंथन का अमृत कविता विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा

*ह्रदय मंथन का अमृत है कविता*
*तपते मरुधर में, है हरियाली कविता*
*अल्फाजों के चूल्हे में, भावों का इंधन है *कविता
*एहसासों के ज्वालामुखी से बहता
अनुभूति का मैग्मा है कविता*
*बैचेन हो मन तो सुकून है कविता*
*अनुभूति के मंडप में,इजहार का अनुष्ठान है कविता*
*दिल की सड़क पर, कल्पनाओं का पुल है कविता*
*सहज रूप से बहता,झर झर भावों का निर्झर है कविता*
*सावन भादों की बरखा है कविता*
*लेखन के तालाब में सबसे सुंदर कमल है कविता*
*मन के समस्त विकारों को धोने में सक्षम है कविता*
*सागर मंथन के दौरान निकला था जो अमृत,वो अमृत है कविता*
*अनुभूति की मांग में अभिव्यक्ति का सिंदूर है कविता*
*निर्मल मन के खेत में,
भावों की हरियाली है कविता*
*शब्दों की ही नहीं,संवेदना की दिवाली है कविता*
*विविध रस, छंद,अलंकारों की भूमि है कविता*
*हृदय सागर मैं जब चलती है भावों की कुदाली, खुद ही फूट पड़ती है कविता*
*रंगों की रंगोली,इंद्रधनुष के रंग है कविता*
*हृदय के गर्भ से उपजी,सृजन की सबसे प्यारी रचना है कविता*
*शब्दों का चयन,भावों का दर्पण, कल्पना का आईना है कविता*
*सरल सहज और संवेदनशील चित का परिचय पत्र है कविता*

और परिचय क्या दूं तेरा ????
*लेखन की सविता है कविता*

एक शर्त है बस कविता की,
 कविता लिखने से पहले खुद कविता बनना पड़ता है। दिमाग की नहीं दिल की सुननी पड़ती है।निर्बाध गति से बह जाती है जो हृदय से काव्य धारा वह कविता बन जाती है।।दिल के कपाट पर देती है जो सीधे ही दस्तक,वह कविता बन जाती है।
जो कविता दिल में बस जाती है,वह युगों युगों तक अमर हो जाती है।
भावों को जब मिल जाते हैं स्वर,
फिर कविता बन जाती है।।
        स्नेह प्रेमचंद

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