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सच में ऐसी सी होती है मां(( विचार स्नेह प्रेमचंद द्वारा))

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  2. बहुत ही खूब लिखा .... अतुल्य अमूल्य... नदियों के भाव से मां की बहुत ही सुन्दर रचना प्रस्तुत की... कहां नहीं है मां सृष्टि के एक एक कण में मां जीवन के एक एक क्षण में मां ..
    नदी सागर पर्वत पहाड़ चोटी हर जगह है सुशोभित मां और क्या ही कहुं में आपके हृदय के बारे में अगर खोज करू मैं इसकी तो हर कोने में मिले मुझे मां मां मां हर सुबह हर शाम 💖
    बहुत अनमोल है आपका हृदय जो दुनिया की सबसे अनमोल दौलत मां की ममता से भरा है जिसका कोई मोल नहीं क्यूंकि वो बहुत अनमोल है!

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