**एक एक करके बना काफिला,
कितना प्यारा ये परिवार**
*जहां जनकल्याण ने सदा किया है
कला,स्वच्छता,सौंदर्य का दीदार*
*इस परिवार के मतवाले आ जाते हैं
सार्थक करने अपना हर इतवार*
*सोच,कर्म,परिणाम को ऐसी बहती है त्रिवेणी,आकंठ डूब जाते हैं हर बार*
और अपरिचय क्या दूं उसका????
*है वो सिर्फ और सिर्फ हमारा प्यार हिसार*
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